अब 10 +2 नहीं 5+3+3+4 होगा स्कूल

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नई शिक्षा नीति में बड़े बदलाव

नईदिल्ली।

अब 10 + 2 के स्कूली पाठ्यक्रम का ढांचा बदल कर 5 + 3 + 3 + 4 कर दिया गया है जोकि 3-8, 8-11, 11-14, और 14-18 आयु वर्ग के मुताबिक लागू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि ऐसा करने से 3 से 6 साल के आयु वर्ग को स्कूली शिक्षा के तहत कवर किया जाएगा जो कि अब तक कवर नहीं हुए थे और वैश्विक स्तर पर भी माना जाता है कि इस उम्र में ही दिमाग का विकास होता है।

नई शिक्षा नीति के तहत नए सिस्टम में 12 साल की स्कूल और 3 साल की प्री स्कूल की पढ़ाई बच्चे को करनी होगी।

स्कूली शिक्षा को चार भागों में बांटा गया है।

फाउन्डेशन स्टेज, मूलभूत स्तर

इस स्तर को दो भागों में बांटा गया है। पहला 3 साल की आंगनवाड़ी या प्रीस्कूल + 2 साल का प्राइमरी स्कूल (कक्षा एक से दो), दोनों स्तर 3 से 8 साल के आयु वर्ग को कवर करेंगे। इसमें बच्चों को विभिन्न स्तरों में खेलकूद एक्टिविटी आधारित लर्निंग पाठ्यक्रम कराए जाएंगे।

प्रारंभिक चरण

यह स्तर कक्षा 3 से 5 और 8 से 11 साल के आयु वर्ग के बच्चों को कवर करेगा। इसमें बच्चों को विज्ञान गणित सामाजिक ज्ञान और हिनेटिव से संबंधित प्रयोगात्मक यानी एक्सपेरिमेंटल पढ़ाई कराई जाएगी।

मध्य चरण यानी मिडिल स्टेज

इसमें 6 से 8 कक्षा के लिए 11 से 14 साल के आयु वर्ग के बच्चों को कवर करेगा इसमें विषय आधारित शैक्षणिक पाठ्यक्रम होगा।

माध्यमिक चरण, सैकेंडरी स्टेज

इस चरण में 9 से 12 कक्षा के रूप में दो भाग होंगे। पहला 9 से लेकर 10 कक्षा तक दूसरा भाग 11वीं से 12वीं तक का होगा। इसमें छात्रों को विषय चुनने होंगे साथी विषय के बारे में गहराई से पढ़ाया जाएगा। 10 वीं कक्षा मे एग्जिट और बाद में 11वीं कक्षा में पुन : प्रवेश का भी विकल्प होगा।

8 साल के बच्चे के लिए एनसीईआरटी पाठ्यक्रम तैयार करेगा। इसके लिए अध्यापकों की ट्रेनिंग भी करवाई जाएगी और शिक्षा मंत्रालय के साथ-साथ महिला बाल विकास और स्वास्थ्य मंत्रालय भी इस पाठ्यक्रम और ट्रेनिंग को तैयार करने में मदद करेगा

 छठी कक्षा से शिक्षा से ही वोकेशनल पढ़ाई कराई जाएगी साथ में इंटर्नशिप कार्यक्रम भी होगा।

पांचवी कक्षा तक मात्र स्थानीय और क्षेत्रीय भाषा में ही पढ़ाई

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कम से कम कक्षा 5 तक मातृत्व, स्थानीय और क्षेत्रीय भाषा में ही पढ़ाई करने पर जोर दिया गया है। कोई छात्र चाहे तो कक्षा 8 और के बाद भी इन भाषाओं में अपनी शिक्षा जारी रख सकता है।

संस्कृत स्कूल और उच्च शिक्षा के हर स्तर पर छात्रों को एक विकल्प के तौर पर तीन भाषाई फार्मूला पेश की जाएगी। भारत की अन्य शास्त्रीय भाषाएँ और साहित्य भी विकल्प के रूप में उपलब्ध हैं। किसी भी छात्र पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी। कक्षा 6 से 8 के बीच में ‘ भारत की भाषाओं ‘ में फन प्रोजेक्ट एक्टिविटी के तौर पर भाग ले सकते हैं।