किसानों को आंदोलन खत्म करने का सम्मानजनक रास्ता नहीं दे रही सरकार, टकराव पहले से ज्यादा

0
121

26 जनवरी की घटना के बाद मोदी सरकार किसान आंदोलन को लेकर पहले से ज्यादा गर्म दिख रही है। सरकार अब भारी पुलिस बल के जरिए किसानों की घेरेबंदी में जुट गई है। सरकार ने आंदोलन को खत्म करने के लिए चल रही बातचीत को बंद कर दिया है और फिर से शुरू करने का कोई संकेत नहीं दिया है। किसान नेता राकेश टिकैत कह रहे हैं कि वह बात करना चाहते हैं लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक कोई संदेश उनको नहीं भेजा गया है। दरअसल किसान चाहते हैं कि मोदी सरकार उन्हें आंदोलन खत्म करने का एक सम्मानजनक रास्ता दे लेकिन सरकार इसके लिए तैयार दिखते नहीं दिख रही है सूत्रों का कहना है कि किसान सरकार को संदेश दे चुके हैं कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे बातचीत करने के लिए नहीं बुलाते तब तक आंदोलन थमने का नाम नहीं लेगा लेकिन सरकार ने किसानों की यह मांग ठुकरा दी है और कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के स्तर पर मामले को सुलझाने की सलाह किसानों को दी है लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि इससे बात नहीं बनने वाली और उन्हें अपने समर्थकों जवाब देना भारी पड़ जाएगा इसलिए खुद प्रधानमंत्री को उन्हें बातचीत के लिए बुलाना चाहिए और कानून को एक से डेढ़ साल तक लागू नहीं करने यानि होल्ड पर रखने का आश्वासन देना चाहिए। हालांकि अभी एक सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री मौजूद थे और बाहर खबरें आई थी कि उन्होंने कहा है कि किसानों और उनके बीच की दूरी सिर्फ एक कॉल है। इसके बाद से माना जा रहा था कि प्रधानमंत्री शायद किसान नेता राकेश टिकैत को फोन कर सकते हैं लेकिन सरकार को अभी नहीं लग रहा है कि प्रधानमंत्री को इस पूरे मामले में लाया जाए हो सकता है कि प्रधानमंत्री की जगह अमित शाह को सामने लाकर आंदोलन को खत्म करने का प्रयास किया जा सकता है लेकिन सरकार के रणनीतिकारों को आशंका है कि इसके बाद भी किसान नेताओं के आंदोलन को खत्म करने के लिए राजी होने की कोई गारंटी नहीं है इसलिए सब कुछ अस्वस्थ होने के बाद ही सरकार किसानों के साथ समझौते के लिए तैयार होगी और इससे पहले वह उन्हें की घेराबंदी करने की अपनी कोशिशों को जारी रखेगी।