किसानों से बातचीत पर प्रश्न चिन्ह, बैकफुट पर किसान नेता

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पिछले दो महीनों में, किसान संघों ने यह सुनिश्चित करने के लिए ज़ोरदार काम किया था कि केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ उनका विरोध किसी भी कानून और व्यवस्था की घटनाओं से मुक्त रहे। नक्सलियों से लेकर खालिस्तान तक उन्हें नाम कहने वाले आलोचकों के प्रति उनका मुकाबला शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन था। हालांकि गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी में हुई हिंसा, लाल किले पर तूफान के लिए भीड़ ने सरकार को अपने मामले को उठाने का मौका दिया है कि इस आंदोलन में सिर्फ किसान ही नहीं बल्कि कट्टरपंथी तत्व भी शामिल हैं । संसद का बजट सत्र झगड़ालू होने की उम्मीद है।

नए कानूनों को होल्ड पर रखने की सरकार की पेशकश को यूनियनों ने खारिज कर दिया था और इसके बाद मंगलवार की हिंसा हुई ।सरकार इस बात का भी इस्तेमाल करेगी कि पंजाब की खेत यूनियनों और यहां तक कि कांग्रेस सरकार ने भी खुद को दूर कर लिया है और मंगलवार की घटनाओं, खासकर लाल किले पर निंदा की है ।

सरकार के एक सूत्र ने कहा, आगे बढ़ने की हमारी रणनीति में निश्चित रूप से बदलाव आएगा। “आप बल द्वारा लाल किले में प्रवेश नहीं कर सकते, वहां एक झंडा फहराते हैं और फिर कहते है कि चलो कानूनों के बारे में बात करते हैं.” “अगर किसान नेता हमारे साथ किसी समझौते पर पहुंचते हैं और ये लोग (आंदोलनकारी) उसे स्वीकार नहीं करते हैं तो ये नेता क्या करेंगे? सूत्र ने कहा, आज की घटनाएं दिखाती हैं कि उनकी बात भी नहीं चल सकती है ।

दिल्ली में अराजक दृश्यों के साथ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ते हुए पुलिसकर्मियों पर हमला किया और धार्मिक झंडा फहराने के लिए लाल किले में प्रवेश किया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘ क्या हुआ है और क्या गलत हुआ, इसका आकलन लंबित है, हम कुछ नहीं कहना चाहते ।

सूत्रों का कहना है कि ट्रैक्टर रैली एक तरफ से किसानों के लिए प्रदर्शन को खत्म करने के लिए एक जरिया था जिसे एग्जिट प्वाइंट कहा जा सकता है।

सरकार के एक अन्य सूत्र ने कहा कि सरकार अभी तक काफी नरम रही है और उसने फार्म किसानों के साथ कई समझौते किए हैं जिसे किसान नेताओं ने ठुकरा दिया है। अब चीजों ने दूसरा मोड़ ले लिया है और असामाजिक तत्व इस बातचीत को पटरी से उतारना की धमकी दे रहे हैं हमें उम्मीद है कि किसान नेता इस अवसर को हल निकालने में प्रयोग करेंगे
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अधिकारियों ने दिल्ली पुलिस की कार्यवाही को लेकर भी कहां कि सिर्फ आंसू गैस के गोले फेंकने के अलावा पुलिस ने कोई अन्य एक कड़ी कार्यवाही नहीं की क्योंकि उन्होंने सही दम दिखाया जबकि विरोधियों विद्रोहियों ने हिंसा का रास्ता अपनाया।

उधर भाजपा किसान आंदोलन को लेकर बहुत आक्रमक हो गई है उसने किसानों को धरना कर रहे किसानों को उपद्रवी करार दिया।

भाजपा ने अपना रुख बदलने की कोशिश की है। मंगलवार देर रात भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी के अन्य नेताओं के साथ मिलकर मुख्यालय में बैठक की।

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरलीधर राव ने कहा कि हम समझते थे कि विरोध सरकार की सुधार नीति के खिलाफ है लेकिन अब यह दिख रहा है कि यह विरोध भारतीय गणतंत्र और उसकी आत्मा के खिलाफ है, राष्ट्रीय राजधानी में आज आज विश्वास और आजादी की हिंसा देखी गई।

भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने ट्विटर पर सवाल दागा कि दिल्ली में आंदोलन के नाम पर क्या हो रहा है ? क्या देश के किसान ऐसा कर सकते हैं?

भाजपा के नेता राम माधव ने विपक्ष को इस हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा की किसान कानूनों के सुधार के बारे में तमाम झूठी अफवाह फैलाने के बाद राहुल और उनके साथियों ने भारत में ट्रंप मॉडल पर हिंसा फैलाने की कोशिश की है।

हालांकि कम से कम 2 वरिष्ठ नेताओं ने इस बात का ख्याल रखा कि सरकार ऐसी भी कोई चीज नहीं करेगी जिससे कि वह किसान विरोधी दिखाई दे और अभी भी वह सावधानी से चलना चाहती है क्योंकि वह नहीं चाहती कि आंदोलन देश के अन्य इलाकों में भड़के।