किसान आंदोलन से लोगों को बड़ा नुकसान, हर रोज देश और लोगों को 3 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान, हालात खराब

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किसान आंदोलन से आम लोगों की जिंदगी पर भी असर पड़ रहा है। भले यह असर सीधे दिखाई नहीं दे रहा, लेकिन औद्योगिक संगठनों के अध्ययन पर नजर डाली जाए तो लोगों को हर रोज 350 करोड़ का नुकसान हो रहा है। यह इस वजह से हो रहा है क्योंकि किसान देश के प्रमुख राजमार्गों पर पिछले 3 महीने से ज्यादा के समय से धरना दे रहे हैं और उसकी वजह से ना सिर्फ लोगों को आने-जाने बल्कि जरूरी और फर्नीचर इलेक्ट्रॉनिक अप्लायंस समेत तमाम तरह के सामान की सप्लाई पर सीधा असर पड़ रहा है।

माल गाड़ियों और ट्रकों को घूम कर सप्लाई करनी पड़ रही है परेशानी सिर्फ लोगों के घर से ऑफिस जाने में नहीं हो रही बल्कि सभी तरह के सामान की सप्लाई एक तरह से थम गई है।
औद्योगिक संगठन एसोचैम का कहना है कि माल सप्लाई ट्रकों का ईंधन पहले के मुकाबले 8 फ़ीसदी बढ़ गया है जिस की वजह से इन ट्रकों पर आ रहे सामान का दाम भी बढ़ रहा है ज्यादातर समान चाहे वह खाने-पीने का हो या फिर फर्नीचर फ्रिज टीवी आदि हो सब की कीमतें कुछ ना कुछ बढ़ रही हैं नया सामान महंगा मिल रहा है और आम आदमी को पहले से ज्यादा चुकाना पड़ रहा है। एसोचैम का आकलन है कि यह आंदोलन इस तरह से ही लंबे समय तक चलता रहा तो देश का आर्थिक विकास रुक जाएगा और सरकार जितना भी मेहनत कर ले, नुकसान को रोकना बहुत मुश्किल होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार ने करोड़ों रुपए की लागत से 8 से 14 लाइन का मेरठ एक्सप्रेस हाईवे बनाया था लेकिन किसानों ने इसको बंद कर दिल्ली और यूपी की लाइफ लाइन बंद कर दी है इससे सिर्फ सरकार ही नहीं बल्कि लोगों को सीधा नुकसान पहुंच रहा है। दिल्ली और गाजियाबाद नोएडा की सीमा से जुड़े कई उद्योग धंधे दुकाने में जरूरी सामान नहीं पहुंच पा रहा है इसकी वजह से दुकानदार ही नहीं बल्कि आम लोग भी परेशान हैं लॉकडाउन के चलते पहले से ही लगाकर दुकान सामान नहीं होने की वजह से परेशान थे लेकिन लॉक डाउन खुलने के बावजूद सीमाएं सील होने की वजह से इसका सीधा असर बड़े से छोटे बिजनेसमैन और ग्राहक दोनों पर पड़ रहा है। विडंबना यह है कि किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से भी कोई पहल नहीं की गई है। सरकार ने इसे अपनी किस्मत पर छोड़ दिया है और सारा फोकस बंगाल के चुनाव पर लगा दिया है। सूत्रों का कहना है कि बंगाल केरल और असम में चुनाव के बाद ही किसान आंदोलन से सरकार निपटने का फैसला अंदर खाने ले चुकी है। इन राज्यों के चुनाव नतीजे 2 मई को आएंगे अगर इस खबर पर विश्वास किया जाए तो इसका मतलब यह हुआ कि किसान आंदोलन मई तक चलना तय है और उसके बाद भी कोई पक्का नहीं है कि आंदोलन खत्म हो पाए।