कोई भी राजनेता मास्क नहीं पहनता

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पांच राज्यों के चुनाव के दौरान देशभर में कोरोना बीमारी का फैलना तेज हो गया है लेकिन चुनाव के दौरान नेता बिल्कुल मार्क्स नहीं पहन रहे हैं जबकि लोगों को मास्क पहनने के लिए कहा जा रहा है और ना पहनने पर हजारों रुपए के जुर्माने ठोके जा रहे हैं।

नेताओं के लिए अलग कानून और लोगों के लिए अलग कानून देखने को मिल रहे हैं।

गृह मंत्री अमित शाह जिन पर देश में इस बीमारी को रोकने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है वह बंगाल और केरल में रोड शो में बिना मास्क के प्रचार करते हुए दिख रहे हैं।

मोदी सरकार के ज्यादातर मंत्री ही सिर्फ मास्क लगाकर प्रचार करने में व्यस्त नहीं है।

उनके अलावा विपक्ष के नेता भी मास्क नहीं लगा रहे हैं।

राहुल गांधी खुद केरल में बिना मास्क के चुनाव प्रचार करते हुए दिखाई दिए।

कोरोना बीमारी को लेकर सरकार और राजनेताओं के दौरे मापदंड देखकर आम जनता को समझ नहीं आ रहा है कि क्या कानून उनके लिए ही बने हैं।

क्या वही लोग को कोरोना फैलाते हैं ? क्या राजनेता कोरोना नहीं फैला सकते ?

वह आखिर क्यों मास्क नहीं पहनते हैं ?

इन राजनेताओं के रोड शो और रैलियों में भी भयंकर भीड़ हो रही है लेकिन पुलिस भी उनकी रक्षा कर रही है और मीडिया भी उनको जोर शोर से दिखा रही है।

कोई सीधे सवाल पूछने से डर रहा है कि आखिर वह कोविड-19 से बचने के सरकारी उपाय खुद पर क्यों नहीं अपना रहे ?

बंगाल के चुनाव में सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिल रही है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुद की चुनाव रैलियों में बहुत ज्यादा भीड़ है।

भीड़ में कोई सोशल डिस्टेंसिंग नहीं होती और कई चेहरे बिना मास्क के दिखाई देते हैं।

आखिर क्यों चुनाव के चक्कर में कोविड-19 के दिशा निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा और फिर लोगों से उम्मीद की जा रही है कि वह दिशा निर्देशों का पालन करें।

कार में बैठकर लोग जा रहे हैं तो उनका मास्क नहीं लगाने को लेकर जुर्माना किया जा रहा है।

अभी तो एक और आदेश आया है कि अगर कार में अकेला कोई व्यक्ति भी बैठा है और उसने मास्क नहीं लगाया है तो उसका भी जुर्माना लगेगा।

कोविड-19 के नाम पर लोगों को परेशान करने और शायद यही कारण है कि कई मौके पर लोगों ने सरकार की शक्ति का विरोध किया है और पुलिस सुबह आम लोगों के बीच झड़प देखने को मिली है।