कोरोना के कहर बढ़ने के साथ ही पुलिस और प्रशासन व आरडब्लूए का कहर भी लोगों पर बढ़ा

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कोरोना के बढ़ते कहर के साथ ही लोगों पर सख्ती और और उन्हें परेशान करने के मामले में लगातार बढ़ने लगे हैं।

प्रशासन और पुलिस कोरोना को रोकने के नियमों का हवाला देकर लोगों को गैर जरूरी तरीके से परेशान करने में भी जुट गई है।

इनके अलावा इलाके की आरडब्ल्यूए और छूट भैया नेता भी लोगों को नियमों में बांधकर अपना हित साधने में जुट गए हैं।

मास्क नहीं पहनने को लेकर लगाए जा रहे जुर्माने को लेकर पुलिस लोगों को सड़कों पर परेशान कर रही है और कार में बैठे लोगों से जुर्माना लेने का दबाव बना रही है।

अगर कोई जुर्माना नहीं देता तो उसके साथ सांठगांठ कर जुर्माने से कम पैसा लेकर मामला रफा-दफा करने की भी बात सामने आ रही है।

दिल्ली में तो मास्क नहीं पहनने का जुर्माना ₹2000 है इसलिए पुलिस की ओर से लोगों को परेशान करने के मामलों में भी इजाफा हो रहा है ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां 2000 के जुर्माने की वजह से लोगों की प्रताड़ना काफी बढ़ गई है।

जरा सा नाक के नीचे मार्क्स नहीं पहनने को लेकर भी पुलिस लोगों को परेशान कर रही हैं वहीं कई आरडब्ल्यूए लोगों पर बंदिशे लगाने पर जुट गई है।

रात 10:00 बजे तक सोसायटी के गेट बंद कर दिए जाते हैं खाने की डिलीवरी रोक दी जाती है और आवाजाही पर भी रोक लगाई जा रही है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कोरोना के नियमों के नाम पर लोगों के साथ ज्यादती की जा रही है और उनके मौलिक अधिकारों को खत्म करने की एक कोशिश है।

पिछले लॉकडाउन में भी पुलिस के लाठी डंडा की बाढ़ आम आदमी पर आ गई थी और उन्हें गैरजरूरी नियमों का सामना करना पड़ा था।

अभी काम धंधे चौपट है और ऐसे में कोरोना के नाम पर सख्त नियम और कानून बनाकर आम आदमी की रोजी-रोटी पर सबसे ज्यादा खराब असर पड़ रहा है।

सरकार को चाहिए कि वह नियम कानून के चक्कर में लोगों का जीना मुश्किल ना करें और जागरूकता फैलाने की कोशिश करें ना कि लोगों में दहशत फैलाने की।