कोरोना के बाद करवाया टेस्ट आए नेगेटिव पर फेफड़ों में जमा हुआ है वायरस

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उत्तराखंड में एक नया अजीब मामला सामना आया है। दरअसल कोरोना जांच के लिए किए गए रैपिड एंटीजन और आरटीपीसीआर की जांच में मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है, जबकि उनमें वायरस के लक्षण मौजूद हैं। मरीजों में वायरस की पुष्टि के लिए डॉक्टर उनकी एक्स-रे जाचं करवा रहे हैं, जिसमें वायरस के साफतौर से संकेत मिल रहे हैं। मरीजों की एक्से-रिपोर्ट के आधार पर ही उनका का इलाज भी किया जा रहा है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व उत्तराखंड के सचिव डॉ. डीडी चौधरी कहते हैं कि उनके पास भी ऐसे तीन मरीज आए हैं जिनकी कोविड-19 जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है, जबकि एक्स-रे रिपोर्ट में कोरोना कंफर्म हो रहा है। कहते हैं कि तीन मरीजों को बुखार व गले में खराश की शिकायत थी लेकिन उनकी कोविड-19 जांच नेगेटिव आई थी।

मरीजों की एक्स-रे रिपोर्ट में कोरोना वायरस कंफर्म हो गया था। संक्रमितों के फेफड़ों में स्पॉट बने हुए थे, जोकि कोरोना मरीजों के फेफड़ों में बनते हैं। कोरोना कंफर्म होने के बाद तीनों मरीजों को कोरोना में इस्तेमाल होने वाली दवाई दी गई। डॉ. चौधरी कहते हैं कि यह चिंता की बात है कि पॉजिटिव मरीजों में भी रैपिड एंटीजन और आरटीपीसीआर की रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है।

कहते हैं कि तीनों मरीजों में से सबसे कम उम्र 28 वर्ष का संक्रमित था जबकि सबसे ज्यादा 42 साल का मरीज था। बताया कि कोविड-19 वायरस की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाले टेस्ट में सिर्फ 70 प्रतिशत विश्वसनीयता होती है। उनके अनुसार, किसी भी टेस्ट में शत-प्रतिशत सही रिजल्ट आना संभवन नहीं है।कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए हम सभी के लिए जरूरी है कि कोविड-19 की गाइडलाइन का सख्ती से पालन किया जाए।

स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी कहते हैं कि सभी को अनिवार्य तौर से मास्क पहनना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई है कि आने वाले दिनों में कोरोना मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है इसलिए सभी को वायरस के प्रति एहतियात बरतने की जरूरत है। नेगी कहते हैं कि सभी जिलों के डीएम को कोविड-19 गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराना चाहिए।

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