गलतियों से सीखा और 17 दिन की तैयारी से बने IPS

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कौन कहता है, जीवन में असफल होने के बाद सफल नहीं हो सकते है। अगर जीवन में सही दिशा में आगे बढ़ा जाए और इरादे को मजबूत रखा जाए तो हर सपने को पूरी की जा सकती है। इसी तरीके से UPSC में 55वीं रैंक पाने वाले अक्षत कौशल की एक सक्सेस स्टोरी है, जो सभी उम्मीदवारों, के लिए मिसाल है जो एक असफलता से पीछे हट जाते हैं। अक्षत को भी बहुत बेहतर तैयारी करके भी उन्हें पांच बार यूपीएससी में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं माना। फिर 17 दिनों की तैयारी ने अक्षत को IPS अफसर बना दिया। उन्हें UPSC एग्जाम में सफलता मिली और अपने सपना को साकार किया।

इन पांच सालों में उन्होंने पांच सबक सीखे, जानें वो क्या हैं।

अक्षत ने बताया कि किस तरह उन्होंने पहले साल तैयारी में जान झाेंक दी थी। सुबह सात बजे से नौ बजे तक कोचिंग पढ़ते थे. उसके बाद दिन में अपना वक्त कहीं भी गंवाए बिना वो सिर्फ किताबों में लगे रहते थे. लेकिन, इतनी कठिन मेहनत के बाद भी वो पहले साल में प्री भी नहीं निकाल पाए।

अक्षत कौशल ने साल 2012 में तैयारी शुरू की थी। वो कहते हैं कि साल 2013 में भी मैंने ऐसी गलती कर दी कि सी सैट भी नहीं निकाल पाया। उन्होंने इस दौरान पांच सबक सीखे। इससे आप भी सीखकर सफलता पा सकते हैं।

पहला  सबक- दूसरों की ग‍लतियों से सीखें 
अक्षत कौशल के मुताबिक सीखने को तो आप अपनी गलतियों से भी सीख सकते हैं। लेकिन सिविल सर्विस की तैयारी  के लिए परीक्षा के नेचर को समझना जरूरी है, अपनी तैयारी को पुख्ता रखें और कोशिश करें कि अपनी खुद गलतियां करने से बचें और दूसरे की गलतियों से सीखें

दूसरा सबक- किसी विषय को हल्के से न लें 
किसी भी विषय को लेकर अधिक आत्मविश्वास में नहीं आना चाहिए. मैं हमेशा सोचता था कि मुझे ये विषय तो आता ही है, इससे आप उसके बारे में नहीं पढ़ते. इससे होता ये है कि आपका वही विषय रह जाता है।

तीसरा सबक- अपने दोस्तों की बात सुनें 
तैयारी के दौरान तीन बार फेल होने के बाद मुझे लगा कि मैं अब वापस अपनी जॉब में लौट जाऊं. लेकिन मुझे दोस्तों ने समझाया. अक्षत कहते हैं कि तैयारी के वक्त एक सही ग्रुप का चयन जरूरी है, जो आपको न सिर्फ सही सलाह दें बल्कि गलतियों पर भी आपको टोके. 

चौथा सबक- ओवर कॉन्फिडेंस में न आएं 
अक्षत अपना उदाहरण देते हैं कि उन्हें लगता था कि वो बहुत अच्छा लिख लेते हैं. वो अखबार के लिए भी लिखते थे इसलिए भी आत्मव‍िश्वास काफी ऊपर था. लेकिन 2016 में ऐसे में कम नंबर थे. इसलिए जरूरी है कि अगर किसी भी विषय को अगर अपनी ताकत मानते हैं तो परीक्षा के वक्त उसपर अधिक भरोसा करके न चलें. जैसे आप इस विषय को निकाल ही लेंगे, खुद से ज्यादा अनुभवी लोगों से इस बारे में जरूर बात करें. 

पांचवा सबक- अपने दिल की सुनें 
तैयारी के दौरान भले ही सफलता देर से मिले लेकिन आपको अपने दिल की सुनना चाह‍िए। वो कहते हैं कि मैं आईपीएस अफसर बनना चाहता था। तमाम गलतियों से मैंने सीखा था और सिर्फ 17 दिन की तैयारी से मैंने ये परीक्षा निकाल दी क्योंकि मैंने अपना कॉन्सेप्ट पूरी तरह क्लीयर कर लिया था। इससे मुझे सफलता पाने में कोई परेशानी नहीं हुई। इंटरव्यू की तैयारी के दौरान भी अपने पर भरोसा न छोड़ें। बता दें कि आईपीएस परीक्षा 2017 में सफल होने के बाद अक्षत ने अंकिता मिश्रा से शादी की। अंक‍िता आईएएस अफसर हैं।

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