गाजियाबाद बॉर्डर पर टिकैत का धरना जारी, भयंकर ट्रैफिक जाम, विपक्ष के नेता जुटे, मोदी सरकार भी शांत

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दिल्ली और गाजियाबाद के गाजीपुर बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत अपने किसान समर्थकों के साथ जुटे हुए हैं। उनके समर्थन में विपक्ष के कई नेता भी वहां आ गए हैं।

राष्ट्रीय लोक दल के जयंत चौधरी भी अपनी राजनीति चमकाने टिकैत के पास पहुंच गए हैं। वहीं देर शाम तक दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी वहां पहुंचेंगे। इन दलों के समर्थन के बाद टिकट के हौसले और बुलंद हो गए हैं और बागपत जींद आदि इलाकों से भी किसान वहां पहुंच गए हैं। इसकी वजह से भी टिकट अब अपना धरना जारी रखने के लिए दावा करने लगे हैं।

किसान आंदोलन फिर से जिंदा होने की वजह से पुलिस ने आसपास के इलाकों की सारी सड़कें बंद कर दी हैं। nh-24 दोनों तरफ से बंद कर दिया गया है जबकि इससे पहले दिल्ली से आने वाला nh-24 मार्ग खुला रहता था लेकिन आज दोनों बंद कर दिए गए हैं सिर्फ नोएडा से डीएनडी और आनंद विहार वाला रास्ता खुला हुआ है इसकी वजह से इन दोनों रास्तों पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक जाम है।

लोगों को अपने दफ्तर पर पहुंचने में बहुत परेशानी हो रही है। ज्यादातर लोग सड़क के रास्ते को छोड़कर दिल्ली मेट्रो को पकड़ रहे हैं। इसकी वजह से वहां भी अफरा तफरी मच गई है। कोविड-19 महामारी के बावजूद सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है किसान आंदोलन कब खत्म करेंगे इसे लेकर फिर से अनिश्चिता बन गई है बृहस्पतिवार शाम से लेकर देर रात तक चले ड्रामे में लग रहा था कि किसान नेता राकेश टिकैत अपना धरना खत्म कर देंगे लेकिन उन्होंने जब टीवी चैनलों के सामने रोना शुरू किया तो उसके बाद माना जाता है कि स्थितियां काफी बदली है।

टिकैत के रोने को देखकर किसानों ने फिर से गाजीपुर बॉर्डर कुच करने की तैयारी की थी जिसके बाद सरकार ने भी सख्ती बरतने से परहेज किया और पुलिस को धरना प्रदर्शन से वापस लौटने को कहा गया।

पुलिस वहां पूरी फोर्स के साथ जुटी थी। ऐसा लग रहा था कि कुछ समय में टिकट को उठाकर धरना खत्म कर दिया जाएगा लेकिन परिस्थितियां बहुत तेजी से बदली और अभी तक धरना जारी है।

लेकिन सरकार के सूत्रों का कहना है कि किसान चाहे कुछ भी करें लेकिन लंबे समय तक अब और सीमाओं पर धरना नहीं चल सकता।

मुरादाबाद में भी किसानों की पंचायत में भी जारी करने के मुद्दे पर फैसला लिया जाएगा किसान नेताओं पर मोदी सरकार का पूरा दबाव है कि वह जल्द से जल्द आंदोलन को खत्म करें सरकार सूत्रों कि अनेकों इतनी आसानी से खत्म किया जा सकता।