चीन और लद्दाख के तनाव में, चीन को करारा जवाब देने के लिए भारत ने कस ली कमर!

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पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के आस-पास चीन और भारतीय सेना के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है. दोनों सेनाएं आमने-सामने हुईं तो 2017 के डोकलाम विवाद के बाद ये सबसे बड़ा विवाद होगा. पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भारत-चीन के बीच करीब दो महीने से तनाव की स्थिति बनी हुई है. सूत्रों के मुताबिक, भारत ने पेंगोंग त्सो झील और गालवान वैली में सैनिक बढ़ा दिए हैं. इन दोनों इलाकों में चीन ने दो हजार से ढाई हजार सैनिक तैनात किए हैं, साथ ही अस्थाई सुविधाएं भी बढ़ा रहा है. चीन लद्दाख के कई इलाकों पर अपना दावा करता रहा है. इस बीच चीन ने भारतीय इलाके में 10 किलोमीटर भीतर घुसकर 100 से ज्यादा तंबू गाड़ दिए हैं.

लद्दाख स्थित वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की ओर से सीमा विवाद को लेकर चल रहे गतिरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हाई लेवल मीटिंग की. इस बैठक में राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ, जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुख शामिल हुए. पीएम मोदी ने इस बैठक से इतर विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से अलग से इस मामले पर खास बातचीत की.

भारत ने निगरानी भी बढ़ाई

चीन को करारा जवाब देने के लिए भारत ने भी लद्दाख में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैनिकों की संख्‍या बढ़ा दी है. साथ ही निगरानी और गश्‍ती भी कड़ी कर दी है. भारत ने कहा था कि चीनी सेना भारतीय सैनिकों की सामान्य गश्त में बाधा उत्पन्न कर रही है और भारत ने सीमा प्रबंधन को लेकर हमेशा दायित्वपूर्ण रवैया अपनाया है. सूत्रों ने बताया कि पूर्वी लद्दाख के विभिन्न इलाकों में कई बार चीनी सैनिकों द्वारा सीमा पार करने की खबर है और दोनों सेनाओं के बीच कम से कम दो मौकों पर हाथापाई हुई. सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना भी पेंगोंग त्सो झील, गलवान घाटी और देमचौक में अपनी ताकत बढ़ा रही है. उन्होंने बताया कि भारतीय सेना देमचौक और दौलत बेग ओल्डी सहित कई संवेदनशील इलाकों में आक्रामक तरीके से गश्त भी कर रही है.

बुधवार को समीक्षा करेंगे शीर्ष कमांडर
भारतीय सेना के शीर्ष सैन्य कमांडर बुधवार से शुरू हो रहे तीन दिवसीय सम्मलेन के दौरान पूर्वी लद्दाख के कुछ इलाकों में भारत और चीनी सैनिकों के बीच तनावपूर्ण गतिरोध की गहन समीक्षा करेंगे. बता दे कि, सेना के कमांडरों का सम्मेलन साल में दो बार आयोजित होता है. कोरोना वायरस की महामारी की वजह से यह कॉन्फ्रेंस अप्रैल में नहीं हो इस पाई थी. आर्मी कमांडर कांफ्रेंस साउथ ब्लॉक स्थित रक्षा मंत्रालय में होगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कांफ्रेंस की अध्‍यक्षता करेंगे.इस बार यह कॉन्फ्रेंस दो हिस्सों में होगी, पहला हिस्सा बुधवार से शुकवार तक यानी तीन दिन चलेगा. इसके बाद जून के आखिरी हफ्ते में कांफ्रेंस के दूसरा हिस्सा होगा. सेना के मुताबिक, इस कॉन्फ्रेंस का चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चल रही तनातनी से कोई संबंध नहीं है, यह कॉन्फ्रेंस पहले से निर्धारित थी. हालांकि पूर्वी लद्दाख में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ जारी तनाव के बीच यह मुद्दा कमांडर्स के बीच चर्चा में ज़रूर आएगा. इसके अलावा सेना कश्मीर में आतंक विरोधी अभियान की समीक्षा भी करेगी. साथ मे देश के सुरक्षा हालात का आंकलन भी इस दौरान किया जाएगा. सूत्रों ने कहा कि कमांडर जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर भी चर्चा करेंगे. इसके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर भी इस दौरान चर्चा की जाएगी.

चीन बढ़ा रहा सैनिक
लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास पैंगोंग सो झील और गलवान घाटी में चीनी सेना तेजी से अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा रही है और इसके जरिये यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह भारतीय सेना के साथ टकराव की स्थिति शीघ्र समाप्त करने के लिए तैयार नहीं है. ऐसे में भारत भी चीन को करारा जवाब दे रहा है. भारत ने भी लद्दाख में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर सैनिकों की संख्‍या बढ़ा दी है साथ ही निगरानी और गश्‍त भी कड़ी कर दी है.

गालवान इलाके में विवाद भी नहीं, फिर भी चीन घुसपैठ कर रहा’
भारतीय सेना के एक उच्च अधिकारी का कहना है कि दोनों इलाकों में हमारी क्षमताएं चीन से बेहतर हैं. सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि भारतीय पोस्ट केएम120 और गालवान वैली समेत कई अहम पॉइंट्स के आसपास चीन के सैनिक मौजूद हैं. नॉर्दन आर्मी के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डी एस हुड्डा का कहना है कि चीन की ये हरकत सामान्य बात नहीं है, जबकि गालवान जैसे इलाकों में भारत-चीन के बीच कोई विवाद भी नहीं है.

बता दे कि, इस मसले पर इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी सीडीएस जनरल रावत और तीनों सेना प्रमुखों के साथ चीन से तनाव के मामले पर लंबी समीक्षा बैठक कर चुके हैं. राजनाथ सिंह को सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाने इस मामले की स्थिति के बारे में पूरी जानकारी दी थी. वह दो दिन पहले ही लेह का दौरा करके लौटे हैं. इसके बाद यह जानकारी मिली है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सैनिकों की तैनाती पर सवाल पूछे और चीनी तनाव के खिलाफ भारतीय सेना को पूरा सहयोग करने का आश्‍वासन दिया.


भारत ने खारिज किया था चीन का दावा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने चीन के उस आरोप को खारिज किया था कि भारतीय सैनिकों द्वारा चीन की तरफ अतिक्रमण करने की वजह से तनाव बढ़ा. भारत की यह प्रतिक्रिया चीन के उस आरोप के दो दिन बाद आई थी जिसमें उसने कहा था कि भारतीय सेना ने उसके क्षेत्र में अतिक्रमण किया और दावा किया कि यह सिक्किम और लद्दाख में एलएसी के दर्जे को एकपक्षीय बदलने का प्रयास है.

चीन ने लगाए 100 टेंट

बताया जा रहा है कि चीनी पक्ष ने विशेष रूप से गलवान घाटी में अपनी उपस्थिति बढ़ाई है और गत दो सप्ताह में लगभग सौ टेंट लगाए हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की कड़ी आपत्ति के बावजूद चीन क्षेत्र में बंकर बनाने के लिए आवश्यक मशीनें ला रहा है.

इस महीने दोनों देशों के सैनिकों के बीच 3 बार झड़प भी हो चुकी है-

1) 5 मई को पूर्वी लद्दाख की पेंगोंग झील
उस दिन शाम के वक्त  झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए. भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया. पूरी रात टकराव के हालात बने रहे. अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई. बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ.

2) 9 मई को उत्तरी सिक्किम में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद नाकू ला सेक्टर
यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे. आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए.  इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए. यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया, फिर झड़प रुकी.

3) 9 मई को लद्दाख
जिस दिन उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन के सैनिकों में झड़प हो रही थी, उसी दिन चीन ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे थे. चीन के हेलिकॉप्टरों ने सीमा तो पार नहीं की, लेकिन जवाब में भारत ने लेह एयरबेस से अपने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लड़ाकू विमान रवाना कर दिए। सुत्रों के मुताबिक, हाल के बरसों में ऐसा पहली बार हुआ जब चीन की ऐसी हरकत के जवाब में भारत ने अपने लड़ाकू विमान सीमा के पास भेजे.

डोकलाम पर 73 दिन टकराव चला था
भारत-चीन बॉर्डर पर डोकलाम इलाके में दोनों देशों के बीच 2017 में 16 जून से 28 अगस्त के बीच तक टकराव चला था। हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे. आखिर में दोनों देशों में सेनाएं वापस बुलाने पर सहमति बनी थी.

क्या था डोकलाम विवाद?
डोकलाम में विवाद तब शुरू हुआ, जब भारतीय सेना ने वहां चीन के सैनिकों को सड़क बनाने से रोक दिया था. हालांकि चीन का दावा था कि वह अपने इलाके में सड़क बना रहा था. इस इलाके का भारत में नाम डोका ला है, जबकि भूटान में इसे डोकलाम कहा जाता है. चीन दावा करता है कि ये उसके डोंगलांग क्षेत्र का हिस्सा है. भारत-चीन सीमा जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3,488 किलोमीटर लंबी है. इसका 220 किलोमीटर हिस्सा सिक्किम में आता है.