दिल्ली और महाराष्ट्र से घर को लौटने लगे कई मजदूर, क्या फिर से लगेगा लॉकडाउन, मजदूरों का अंदेशा होता है सही

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पिछले साल जब मार्च अप्रैल के महीने में दिल्ली गाजियाबाद बॉर्डर के पास आनंद विहार बस टर्मिनल में कई प्रवासी मजदूरों से मैंने बात की थी तो वह कह रहे थे कि यह लॉकडाउन 14 अप्रैल तक नहीं बल्कि 3 महीने का लॉक डाउन है और आगे भी बढ़ सकता है।

हमने उन्हें समझाया कि लॉकडाउन सिर्फ 14 अप्रैल तक है इसलिए वह दहशत में ना आए और अफवाहों पर ध्यान ना दें और अपने घर को जाएं लेकिन वह मानने को तैयार नहीं थे लेकिन जिस तरीके से 14 अप्रैल के बाद भी लॉकडाउन जारी रहा।

धीरे-धीरे लॉकडाउन को आगे बढ़ाया गया तो उसके बाद लगा कि मजदूरों का अंदेशा बिल्कुल सही था। वह हमसे ज्यादा चीजों को भांपने में सक्षम हैं।

हम पत्रकार भले ही सरकार और निर्णय लेने वालों के ज्यादा करीब होते हैं लेकिन हम उनकी बातों में आ जाते हैं और उनके बताई गई बातों को ही लिखते हैं लेकिन मजदूर को जमीनी हकीकत का हमसे ज्यादा पता है।

अब फिर वही घड़ी अब सामने आ गई है जब फिर लॉक डाउन लगने का अंदेशा मजदूर लगा रहे हैं और अपने घर की ओर अभी से ही बोरिया बिस्तर बांध कर चलने लगे हैं।

दिल्ली पुणे समेत कई इलाकों से मजदूर ट्रेन और बस के रास्ते अपने घर की ओर वापस आने की ओर जुट गए हैं।

हालांकि सड़कों पर पैदल मजदूरों की भीड़ पिछली बार की तरह नहीं दिख रही है क्योंकि अभी ट्रांसपोर्ट व्यवस्था चालू है लेकिन जिस तरीके से दिल्ली समेत कई राज्यों में की स्थिति बन रही है और नाइट कर्फ्यू लगाया जा रहा है।

उसको देखते हुए मजदूरों ने पहले से ही जारी शुरू कर दी है और पिछली बार जैसी पैदल चलने की नौबत ना आए इसलिए वह अपने घर की ओर सावधानी के लिए चले गए हैं जहां तक लॉकडाउन की बात है तो दिल्ली में नाइट कर्फ्यू लगा दिया है। पंजाब में भी सख्ती हो रही है। महाराष्ट्र में कई जगह बंदिशें जारी है। रायपुर में पूरी तरीके से लॉक डाउन लगा दिया गया है। उसको देखते हुए मजबूर किसी तरह का जोखिम लेना नहीं चाहते और कई अपने घर की ओर चल पड़े हैं।