नीति आयोग इस तरह से देश को दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की कर रहा है तैयारी पर खड़ा ना हो जाए बखेड़ा

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भारत को दुनिया का नंबर 1 मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने को लेकर मोदी सरकार के नीति आयोग ने एक ब्लूप्रिंट योजना तैयार की है, जिसमें 45 दिन के अंदर कारोबार लगाने के लिए परमिट मिलने, कमर्शियल बिजली का कनेक्शन 15 दिन के अंदर मंजूर करने और निर्माण कार्य शुरू होने या प्रोजेक्ट मिलने के साथ ही 90 फीसदी भूमि अधिग्रहण, भूमि के टाइटल को लेकर क़ानून बनाना ताकि मुकदमे बाजी कम हो और भूमि अधिग्रहण में सुधार हो पाए।

नीति आयोग ने इस ब्लूप्रिंट को केंद्र और राज्यों के साथ बातचीत के बाद तैयार किया है इसमें देश में इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने को लेकर रोड मैप तैयार किया गया है।

भले ही राज्य सरकारों से बातचीत के बाद इस ब्लूप्रिंट को तैयार करने की बात कही जा रही है लेकिन जिस तरीके से भूमि अधिग्रहण संबंधी तमाम कानूनों में सुधार की बात नीति आयोग ने इस दस्तावेज में कही गई है, उसको लेकर कुछ राज्य सरकारें खासकर विपक्ष शासित सूबे समेत तमाम कर्मचारी और किसान संगठन इसके खिलाफ झंडा बुलंद कर सकते हैं।

राज्यों में आसानी से काम धंधे चलाने यानी इज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए भी नीति आयोग ने कहा है कि इसके लिए राज्य डेडीकेटेड टास्क फोर्स तैयार करें जो कि अपने अपने प्रमुख क्षेत्रों में आने वाली दिक्कतों और मंजूरियों को दूर या कम करने का काम करें ताकि निवेश रोजगार और निर्यात को परोसा मिल सके पूरी कसरत 15 अगस्त से पहले करने का टारगेट है।

नीति आयोग के विश्लेषण के मुताबिक पांच राज्यों गुजरात महाराष्ट्र तमिलनाडु उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में 2736, 2920, 2136, 2054 और 1980 मंजूरिया क्रमश काम धंधा शुरू करने के लिए ली जाती है।

विधि आयोग ने दस्तावेज में लिखा है कि भारत में अथॉरिटी से मंजूरी लेने का काम सबसे बड़ा बोझ है और अगर देश को दुनिया का निवेश के मामले में नंबर वन देश बनाना है तो इज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने की जरूरत है।

दस्तावेज में यह भी कहा गया है कुछ रेगुलेटरी मंजूरी होती तो आज के समय में कोई जरूरत नहीं रह गई है इसलिए इनको हटाने में ही देश की भलाई है।

देश के सभी मंत्रालयों और विभागों को हिना मंजू लिए योग को युक्तिसंगत तरीके से कम करने के लिए कहा गया है और गैर जरूरी कानूनों का बोझ भी कम करने की तैयारी है। इस ब्लू प्रिंट को दो चरण में पूरे करने की बात नीति आयोग ने कही है। राज्य रेगुलेटरी मंजूरियां जैसे लाइसेंस सर्टिफिकेट रिनुअल इंस्पेक्शन, रजिस्टर एवं रिकॉर्ड रिटर्न्स फाइलिंग के काम को 31 मार्च तक घटाने का लक्ष्य है। वही गैर कानूनी पुराने कानूनों को हटाने का काम 15 अगस्त से पहले करने का टारगेट तय किया गया है।