पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ‘इमरान खान’ अपनी ही जनता के लिए बेगाने हुए: अन्य देश के सामने फैलाया हाथ, किसी ने एक डॉलर तक नहीं दिया!

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कोरोना वायरस के कहर से पूरा पाकिस्‍तान भी जूझ रहा है। इस महासंकट की घड़ी में अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान  अपनी ही जनता के लिए ‘बेगाने’ हो गए हैं। दरअसल, पाकिस्‍तान की शक्तिशाली सेना ने पीएम इमरान खान को साइडलाइन कर दिया है और सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने खुद ही इस जंग की कमान संभाल ली है। पाकिस्‍तान में कोरोना वायरस से जूझ रहे डॉक्‍टरों को एक तरफ किट नहीं मिल रही है और वे प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सिंध सरकार और इमरान खान सरकार के बीच तलवारें खिंच गई हैं। कोरोना वायरस से इस जंग में इमरान खान के कड़े फैसले लेने और वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन करने में असफल रहने के बाद सेना प्रमुख ने इमरान खान को साइडलाइन कर दिया है।

क्या आतंकियों को शरण देने के लिए बदनाम पाकिस्तान की कोरोना संकट में कोई भी देश आर्थिक मदद नहीं करना चाहता? पीएम इमरान खान के दावे तो इसी ओर इशारा कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि इस संकट में न तो किसी देश और न ही किसी वैश्विक संगठन ने पाकिस्तान को एक डॉलर की भी मदद की है। ध्यान रहे कि पाकिस्तान जर्जर अर्थव्यवस्था वाले उन देशों में शामिल है जिस पर कोरोना महामारी की दोहरी मार पड़ी है। पड़ोसी देश पहले से ही आईएमएफ और विश्व बैंक के कर्जे से किसी तरह अपनी इकॉनमी चला रहा था और अब कोरोना ने उसकी कमर तोड़ दी है।

कोई एक रुपया देने को नहीं तैयार आने वाले वक्त में भी मुश्किल से निकलने का कोई आसार नहीं दिख रहा है क्योंकि इमरान खान अपील पर अपील किए जा रहे हैं, लेकिन कोई भी देश मदद करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कुछ दिन पहले ही वैश्विक समुदाय से अपील की थी कि कमजोर देशों का ऋण माफ कर देना चाहिए। इमरान ने कहा कि महामारी से इकॉनमी बुरी तरह से प्रभावित हुई है और गंभीर मुश्किलों के बाद भी न तो कोई देश और न ही किसी वैश्विक संगठन ने सिंगल डॉलर की ही मदद की है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि आईएमएफ ने लोन रिपेमेंट में राहत दी है।
वहीं, विरोधियों पर निशाना साधते हुए इमरान ने कहा कि कई लोग सोशल मीडिया पर झूठा प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘जिन्होंने भ्रष्टाचार से पैसे बनाए हैं वे फ्री मीडिया से भयभीत हैं क्योंकि उनका भंडाफोड़ हो जाएगा।’ उन्होंने कहा कि चाहे जितना भी झूठ बोला जाए लेकिन लोगों को अंत में सच पता चल ही जाएगा।

इस बीच मार्च की शुरुआत में पाकिस्तान के लिए अच्छी खबर आई थी जब वर्ल्ड बैंक और एशिया विकास बैंक यानी एडीबी ने भी कोरोना वायरस और उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव से निपटने के लिए 58.8 करोड़ डॉलर देने पर सहमति जताई थी। कोरोना के मामले बढ़ते ही इमरान सरकार ने दोनों बैंकों से बातचीत शुरू कर दी थी। सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि वर्ल्ड बैंक 23.8 करोड़ डॉलर और एडीबी 35 करोड़ डॉलर का लोन देगा। यह पाकिस्तान के लिए बड़ी राहत की बात रही क्योंकि उसे उम्मीद थी कि वर्ल्ड बैंक उसे 14 करोड़ डॉलर ही देगा, लेकिन उसने 23 करोड़ डॉलर से अधिक की मदद की प्रतिबद्धता जाहिर की गई। वहीं, अमेरिका ने कहा था कि वह भी एक करोड़ डॉलर की मदद देगा। इमरान की मानें तो पाकिस्तान को यह रकम अब तक नहीं मिल पाई है।

सदाबहार दोस्त ने तो मदद के नाम पर लगाया चूना
इमरान के बयान से जाहिर होता है कि सदाबहार दोस्त चीन ने भी आर्थिक मदद नहीं की है। हालांकि, उसने मास्क और किट जरूर भेजे थे जिनमें खामियां पाई गई थीं। चीन ने बाकी देशों को तो ठगा ही, उसने अपने सगे कहे जाने वाले पाकिस्तान को भी नहीं छोड़ा। चीन ने मदद की इच्छा जताते हुए कोरोना संक्रमण के बीच सीमा खुलवाई। चीन द्वारा भेजा गया मास्क जब पाकिस्तानी डॉक्टरों ने खोल कर देखा तो वह अंडरवेयर से बना हुआ मास्क था।
वह टीवी प्रोग्राम में लगातार रो रहे, उनके आंसू बह रहें और उन्हें लगता है सुध ही नहीं। यह हैं पाकिस्तान के शीर्ष मौलवी मौलाना तारिक जमील जो कोरोना वायरस के कब्जे में फंसे पाकिस्तान की बदहाली पर टीवी प्रोग्राम में ही रोने लग जाते हैं औऱ अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह सबकुछ ठीक कर दे। मौलाना कहते हैं कि अमेरिका के डॉक्टर के पास तक इलाज नहीं तो हमारे यहां के पुराने अस्पतालों में क्या इलाज हो पाएगा। वह बार-बार हाथ उठाकर अल्लाह से रहम की भीख मांगते हैं।

बदहाल अस्पताल पर फफके मौलानातारिक जमील उस वक्त आलोचनों के केंद्र में आ गए थे जब उन्होंने कहा था कि महिलाओं द्वारा कम कपड़े पहनने से नाराज होकर अल्लाह ने कोरोना भेजा है। अब उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह कह रहे हैं कि हमारा दुख यह नहीं है कि कोरोना है, हमारा दुख यह है कि इल्लाह का सबसे बड़ा इबादतगाह (मक्का) बंद है।

पाकिस्तान की खास्ता हालात के संदर्भ में वह कहते हैं, ‘या अल्लाह हमारे पास तो इलाज भी नहीं है।हमारे पास तो अस्पताल भी बर्बाद हैं। अमेरिका के डॉक्टर भी अप्रशिक्षित हैं तो हमारे डॉक्टर क्या करेंगे। पाकिस्तान के पुराने-पुराने अस्पताल क्या करेंगे। आ जा अल्लाह, आ जा अल्लाह। तू कहता है कि अरब आ जा। मैंने फतवा भी झेल लिया, लेकिन मैं कहूंगा कि तू आ जा। तमाम धर्म के लोगों की मदद कर, हर मजहब के लोग भाई ही तो हैं। सभी आदम की औलाद हैं। इस आफत को खत्म कर दे अल्लाह। हमारे यहां तो दवाई , अस्पताल नहीं हैं। 70 फीसदी आबादी गांव में रहती है।’ मौलाना तारिक ने कहा, ‘करोडो़ं लोग, करोड़ बुजुर्ग, माएं, बच्चे तेरे दरबार में फकीर बनकर बैठे हैं। सारे बादशाह फकीर बने हुए हैं। तेरे दरबार में जितनी फकीर आते हैं तू उतना खुश होता है। लोग जितनी जिद्द करते हैं तू उतना खुश होता है।’ मौलाना कहते हैं हमारा सबसे दुखड़ा यह है कि तेरा इबादतगाह बंद है। कोरोना से मरकर तो शाहदत ही मिलेगी न लेकिन तेरे महबूब के दरबार में सलाम करने वाला कोई नहीं रहेगा। मेरा मालिक ये क्या हो गया। ये क्या हो गया? ‘ इतना कहते कहते हुए जोर जोर से रोने लगते हैं और दुआओं में बार-बार उनके हाथ उठने लगते हैं। उन्हें सुध ही नहीं रहता कि वह एक टीवी चैनल से बातचीत कर रहे हैं।

पाकिस्तान में भी कोरोना वायरस ने हालात खराब कर रखे हैं। खासकर लॉकडाउन की स्थिति में गरीब जनता को हो रहीं परेशानियों से पाकिस्तान के एक शख्स ने कहा कि उसका बड़ा परिवार है, गुजारा करना मुश्किल हो गया है। ऐसे ही एक जिसमें 4 बीवियां और 26 बच्चे हैं। ऐसे में उनकी भूख के लिए वह क्या कर सकता है। सरकार ने वायरस को फैलने से रोकने के लिए कदम उठाए हैं लेकिन पेट को तो भूख लगती है और शाम को वह अपने परिवार को क्या दे। पाकिस्तान में कोरोना वायरस के चलते लगभग 12,670 लोग चपेट में आ चुके हैं और लगभग 265 लोगों की मौत हो चुकी है। इसे देखते हुए पाकिस्तान ने देशभर में लागू आंशिक लॉकडाउन को दो सप्ताह के लिए 9 मई तक और बढ़ा दिया है।