पिता की छाया से बाहर निकलने के लिए चिराग के पास सिर्फ एक महीना

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बॉलीवुड एक्टर के तौर पर वह सफल नहीं हो पाए लेकिन आने वाला महीना उनके राजनीतिक कैरियर की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है।

बिहार में 28 अक्टूबर को चुनाव है। चुनाव तीन चरणों में है और नतीजे 10 नवंबर को आएंगे। रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान जो 37 साल के हैं।

लोक जनशक्ति पार्टी के मुखिया हैं। उनके सामने बिहार के आगामी चुनाव में अपने पिता की छाया से बाहर निकल कर अपनी पहचान बनाने की चुनौती है। उनके पिता देश के बड़े दलित नेताओं में से एक माने जाते थे और सवाल यह है कि क्या चिराग यह छवि बरकरार रख सकते हैं?

खाद्य मामलों के केंद्रीय मंत्री पासवान की गुरुवार शाम को मृत्यु हो गई थी, लेकिन उससे पहले ही उनके बेटे ने बड़ा जुआ खेलते हुए तय किया था कि बिहार के आगामी चुनावों में लोक जनशक्ति पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी यानी कि बिहार में एनडीए से बाहर निकलकर लोक जनशक्ति पार्टी चिराग पासवान के नेतृत्व में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए मैदान में है।

जिस तरीके से चिराग ने बिहार में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है इससे यह बात की जा रही है कि क्या वह भी अपने पिता की तरह राजनीति दिशा और दशा को भांपने में सक्षम है जैसे उनके पिता चुनावों से पहले ही उस बड़ी पार्टी के साथ हो लेते थे, जिनको चुनावों के बाद जीत मिलना तय होता था। पासवान की इसी खासियत की वजह से वह देश के छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुके हैं और केंद्रीय मंत्री रह चुके थे।

चिराग ने साफ कर दिया है कि वह उनकी पार्टी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव नहीं करना चाहती और केंद्र की भाजपा सरकार से उनका गठबंधन अटूट है।

लोजपा सोमवार बार-बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी आस्था प्रकट करना नहीं भूल रहे हैं। हालांकि चिराग के इस कदम से बीजेपी असहज महसूस कर रही है और उसने एक हफ्ते पहले ही इसे लेकर दूरी बना ली है क्योंकि उस पर आरोप लग रहे हैं कि चिराग पासवान ने यह कदम भाजपा इस इशारे पर ही उठाया है।

चुनाव के नतीजे ना सिर्फ उनका राजनीतिक भविष्य तय करेंगे, बल्कि लोक जनशक्ति पार्टी का भविष्य भी तय करेंगे, अगर 2015 में बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 2 सीटें जीतने वाली लोजपा अच्छा प्रदर्शन करती है तो चिराग की आगे की राजनीति आसान हो जाएगी और अपने पिता से राजनीतिक विरासत का हस्तांतरण भी आसानी से हो जाएगा।

बॉलीवुड कलाकार से लेकर राजनीतिक कलाकार

रामविलास पासवान चिराग को प्यार से दीपू कहते थे या उनके एकमात्र बेटे थे और दूसरी पत्नी रीना से हैं।

चिराग शुरुआत में राजनीति में आना नहीं चाहते थे, उनका मन एक्टिंग करने को लेकर था लेकिन उनके जीवन ने कुछ और तय कर रखा था।

उनकी पहली फिल्म ” मिले ना मिले हम” फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ थी। बॉक्स ऑफिस में 2011 में रिलीज हुई थी, लेकिन फिल्म को लोगों ने ज्यादा पसंद नहीं किया और बिहार में यह 3 दिन के अंदर ही मल्टीप्लेक्स से उतर गई। इसके साथ ही चिराग के फिल्म कैरियर का अंत हो गया और राजनीतिक पारी की शुरुआत हो गई।पासवान हालांकि 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव लगातार जीत चुके हैं लेकिन इसके बावजूद उनका राजनीतिक भविष्य दांव पर है और पिता की मृत्यु के बाद उन्हें अब खुद को साबित करना है