पीएम मोदी ने “मन की बात” कार्यक्रम में देशव्यापी को संबोधित करते हुए कुछ अहम बातें बताई!

0
317

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात’ कार्यक्रम में देशव्यापी को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी से हमारी ‘मन की बात’ भी अछूती नहीं रही है. पीएम मोदी ने कहा कि “पिछली बार जब आपसे बात की थी तब यातायात बंद था, दुकान बज़ार बंद थे, हवाई सेवाएं बंद थी. लेकिन अब वो हालात नहीं हैं. अब काफी कुछ खुल चुका है. श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं, यातायात शुरू हो चुका है, सुरक्षा के बीच हवाई सेवा भी शुरू हो चुकी है – इस कारण हमें पहले से अधिक सावधानी बरतने की ज़रूरत है.” उन्होंने कहा कि हमारी जनसंख्या दूसरे देशों से अधिक है लेकिन फिर भी हमारे देश में कोरोना उतनी तेज़ी से नहीं फैला जितना दूसरे देशों में फैला है. साथ ही कोरोना के कारण हमारी मृत्युदर भी कम है.

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में क्या खास बाते कहा

कोरोना महामारी से जो नुक़सान हुआ उसका दुख सभी को है, लेकिन जो हम बचा पाए हैं वो हमारी सामूहिक संकल्पशक्ति का प्रतीक है. कोरोना के ख़िलाफ़ हमारी ये पूरी मुहिम पीपल ड्रिवन है.

कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई का रास्ता लंबा है. ये एक ऐसी आपदा है जिसका दुनिया के पास अब तक कोई इलाज नहीं है, न ही दुनिया के पास इसका पहले का कोई अनुभव है.

इस कारण हमें रोज़ नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इस दौर में हर वर्ग परेशानी में हैं, लेकिन ग़रीब मज़दूर पर इसकी सबसे बुरी मार पड़ी हैं.

इस संकट की घड़ी में कई लोगों ने सामने आ कर दूसरों की मदद की है. लोगों की शक्ति के अलावा एक और शक्ति हमारे साथ है जो देश में लोगों की सेवा शक्ति. ये केवल हमारा आदर्श नहीं बल्कि हमारी जीवन पद्धति है.

कोरोना वैक्सीन के लिए हमारे लैब्स में जो काम हो रहा है जिसकी दुनिया भर की नज़रें हैं. इससे हम सबकी आशा भी जुड़ी है.

सेवा स्वयं में सुख है, सेवा में ही है. जो दूसरों की सेवा में लगता है उसे डिप्रेशन नहीं होता, उसके जीन में सकारात्मकता नज़र आती है. हमारे डॉक्टर,स्वास्थ्यर्मी, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी, मीडियाकर्मी लोगों की सेवा में जुड़े हैं.

सेवा में अपना सब कुछ समर्पित कर देने वाले लोगों की संख्या अनगिनत है. ऐसे ही कुछ लोग हैं –

तमिलनाडु के जो मदुरै में एक सैलून चलाते हैं. उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए 5 लाख रुपये बचाए थे. लेकिन इस घड़ी में उन्होंने अपनी पूरी कमाई ज़रूरतमंदों और गरीबों की सेवा में लगा दी.

अगरतला में ठेला चला कर जीवन चलाने वाले एक व्यक्ति ने  अपनी रोज़ की कमाई की बचत में से चावल दाल खरीद कर ज़रूरतमंदों को खाना खिला रहे हैं.

देश के सभी हिस्सों से वीमेन सेल्प हेल्प ग्रुप भी परिश्रम कर रहे हैं. गांवों कस्बों में बहनें बेटियां हज़ारों की संख्या में मास्क बना रही हैं. ऐसे सभी लोगों की मैं प्रशासा करता हूं.

संकट की इस घड़ी में देश में इनोवेशन जारी है. हमारे लैब्स कोरोना से लड़ने के लिए रातदिन कोशिश कर रहे हैं. लोग भी अपने संतर पर इस महामारी को फैलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं.

कई दुकानदारों ने दो गज की दूरी के लिए दुकान में पाइपलाइन लगाई हैं जिससे सोश डिस्टेंसिंग का पालन बेहतर तरीके से किया जा रहा है

आगे बढ़ने के लिए इच्छाशक्ति के साथ काफी कुछ इनोवेशन पर भी निर्भर करता है. मानव जाति की यात्रा आधुनिक दौर में इनोवेशन से ही पहुंची है.

कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई का रास्ता लंबा है. ये ऐक ऐसी आपदा है जिसका दुनिया के पास कोई इलाज नहीं है और न ही पहले का इसका कोई अनुभव है. इस कारण हमें रोज़ नई चुनौतियां मिल रही हैं. देश में कोई वर्ग ऐसा नहीं है जो परेशानी में न हो.

इस संकट की सबसे बड़ी चोट ग़रीब मज़दूर और श्रमिक वर्ग पर पड़ी हैं. उनकी पीड़ा को शब्दों में बयान करना मुश्किल है. उनकी और उनके परिवार की तकलीफों को हम सब मिल कर बांटने की कोशिश कर रहे हैं.

रेलवे के साथी उनकी मदद में लगे हुए हैं, वो भी एक प्रकार से अग्रिम पंक्ति में खड़े कोरोना वॉरियर्स ही हैं. श्रमिकों की पीड़ा में हम पूर्वी हिस्से की पीड़ा देख सकते हैं. देश के पूर्वी हिस्से में देश का ग्रोथ इंजन बनने की क्षमता है.

मज़दूरों की ज़रूरतों को देखते हुए नए कदम उठाना ज़रूरी हो गया है. माइग्रेशन कमीशन बनाने की बात हो रही है. केंद्र सरकार भी इसके लिए कोशिश कर रही है. ये सभी फैसले मज़दूरों के विकास और आत्मनिर्भरता के लिए है.

इस संकट से हमने काफी कुछ सीखा है. आज कई समस्याओं ने वो रूप नहीं लिया होता अगर हम आत्मनिर्भर होते. लेकिन अब वक्त आ गया है कि हम वोकल फॉर लोकल को प्रमोट करें.

कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है. कोरोना संकट के दौर में योग ज़रूरी इसलिए है क्योंकि ये कोरोना वायरस हमारे सांस की प्रणाली को प्रभावित करता है. कई सालों से योग में हमारी रेस्पीरेटरी सिस्टम को मज़बूत करने के लिए कई योग हैं जिससे लोगों को लाभ मिल सकता है.

गरीबों को मुफ्त में इलाज देने के लिए सरकार ने आयुष्मान भारत योजना लागू की है जिससे एक करोड़ लोग लाभ ले रही हैं. इनमें गांव के गरीब लोग हैं जो देश में कहीं भी अपना इलाज करा सकते हैं. एक करोड़ से अधिक मतलब नॉर्वे और सिंगापुर जैसे देश की कुल जनसंख्या की दोगुनी संख्या.

इस एक करोड़ लाभार्थियों में से 80 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों से हैं. इनमें से 70 प्रतिशत लोगं की सर्जरी की गई है. भारत में कई लोगों को इस योजना क लाभ मिला है.

कोरोना संकट के बीच देश के कुछ हिस्सों में प्राकृतिक आपदा आई है. एक तरफ पूर्वी भारत में अंफान तूफान के कहर से जूझ रहे हैं तो दूसरी तरफ कई इलाकों में टिड्डी दलों ने कहर बरपाया हुआ है. टिड्डी दल का हमला हमें बताता है कि छोटा जीव भी घातक साबित हो सकता है.

लॉकडाउन के हर कोई प्रभावित ज़रूर हुआ है लेकिन प्रकृति को इसे कुछ लाभ हुआ है. कई जगहों से जानवरों के उन्मुक्त विचरण की ख़बरें रही हैं और वो चिड़िया जो कुछ वक्त पहले तक कहीं खो गई थीं अब उनकी चहचहाने की आवाज़ सुनाई देने लगी है.

जल ही जीवन है और जल की कल है. हमारी कोशिश होनी चाहिए कि पानी को बचाएं, जितना हो सके इसका संरक्षण करें. हमें व्यक्तिगत स्तर पर पर्यावरण के साथ नाता बनाने की ज़रूरत है.

इतनी कठिनईयों के बाद अब जो हालात हैं उसे हमें बिगाड़ने नहीं देना है. हम लापरवाह हो जाएं ये कोई विकल्प नहीं है. कोरोना से लोगों को अभी भी उतना ही गंभीर ख़तरा हो सकता है.

हमें दो गज की दूरी, चेहरे पर मास्क और बार-बार हाथ धोना – ये वो बातें हैं जिसका हमें ऐसे ही पालन करना है जैसा पहले करते आए थे. अपने लिए, अपनों के लिए, अपने देश के लिए ये सावधानियां रखना ज़रूरी है.