पूर्व थल सेना अध्यक्ष जनरल (रिटायर्ड) विक्रम सिंह ने बताया क्यों जरूरी है देश के लिए रफाल

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सेना में मैन पॉवर नहीं घटानी चाहिए । हमें बूट्स एंड पावर चाहिए। बूट्स अभी नहीं घटाने चाहिए। चीन अभी कुछ महीने पहले हमारे साथ दोस्ताना व्यवहार कर रहा था लेकिन अचानक उसने अपना रुख चेंज किया और आज वह हमारा दुश्मन बन गया है। लद्दाख में वह हमारी सीमा में घुस आया है। इसलिए यह कहना कि अभी युद्ध की परिस्थितियां खत्म हुई है तो यह गलत बात है।

रफाल हमारे देश में आया है इससे हमारी ताकत बढ़ेगी। चीन और पाकिस्तान जैसे देशों का हौसला पस्त होगा। हमारी 50, 000 किलोमीटर की सीमा में हमारे 6 पड़ोसी देश है जिसमें से दो हमारे दुश्मन हैं और बाकी देशों को भी चीन हमारे खिलाफ भड़का रहा है। नेपाल का बदलता रुख इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। ऐसी स्थिति में हमें अपनी ताकत बढ़ानी होगी रफाल से हमारी ताकत बढ़ी है, बिल्कुल सही दिशा में एक कदम उठाया गया है अब सरकार को चाहिए कि वह सेना में मैन पावर कम ना करें।

किसी भी हथियार की उसकी ताकत सेना पर ज्यादा निर्भर करती है, ऐसा एयरक्राफ्ट जो मल्टीरोल परफॉर्म बैटल फील्ड में कर सकता है। उदाहरण के लिए अगर युद्ध के हालात बनते हैं तो लद्दाख जैसा इलाका वहां 200 किलोमीटर के दायरे में स्ट्रैटेजिक तौर पर रफाल का इस्तेमाल हो सकता है। ऐसा हथियार हमारे पास है तो उसे एक्सरसाइज के तौर पर हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

इन हालात के अंदर मुझे नहीं लगता कि युद्ध हम शुरू करेंगे हम चीन को मौका दे रहे हैं जहां पर वह आया हुआ है वहां से वापस चले जाए। चीन शायद काफी पीछे भी चला गया है, कुछ इलाकों में जरूर बना हुआ है।

रफाल के आने के बाद चीन पर भी डिटेरेंस प्रेशर बनाया जा सकता है। चीन पर दबाव डालने के लिए उसमें रफाल की एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। जंग अगर शुरू हो जाती है तो डिपेंड करता है कि हम उसे किस लेवल पर ले जाना चाहते हैं। कारगिल के अंदर लड़ाई सिर्फ लाइन ऑफ कंट्रोल के ऊपर पर रही थी वह कश्मीर की तरफ नहीं गई थी लेकिन लद्दाख के इलाके में जंग छिड़ी तो पूरे इलाके में जंग शुरू हो जाएगी। ऐसे में रफाल के मल्टीरोल के तौर पर महत्वपूर्ण रोल अदा करेगा। यह एक और ताकत हमें देगा। सेना के तीनों स्तर पर यह लड़ने में मदद करेगा। पाकिस्तान में बने आतंकवादी कैंपों पर भी इससे हमला किया जा सकता है।