प्रवासी मजदूरों से कोई किराया नहीं ले, राज्य सरकारें भुगतान करें: सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश!

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प्रवासी मजदूरों के पलायन पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले पर अहम आदेश दिया। प्रवासी मजदूर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रवासी मजदूरों से बस और रेल का किराया नहीं लिया जाएगा साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेल में यात्रा करने वाले मजदूरों के लिए खाने की व्यवस्था की जाए. बसों से सफर करने वाले मजदूरों के लिए भी खाने-पीने की व्यवस्था की जाए. यह खर्च राज्य सरकारें ही उठाएं. कोर्ट ने आदेश दिया कि फंसे हुए मजदूरों को खाना मुहैया कराने की व्यवस्था भी राज्य सरकारें ही करें.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश दिए हैं:
-प्रवासी श्रमिकों से ट्रेन या बस का कोई किराया नहीं लिया जाएगा. यह खर्च राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें उठाएं. विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए सभी प्रवासी कामगारों को संबंधित राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा उन स्थानों पर भोजन उपलब्ध कराया जाएगा, जिन्हें प्रचारित किया जाएगा और उन्हें उस अवधि के लिए सूचित किया जाएगा जिसका वे इंतजार कर रहे हैं, ट्रेन या बस में चढ़ने के लिए.
-फंसे हुए प्रवासी श्रमिकों को संबंधित राज्य द्वारा उन स्थानों पर भोजन उपलब्ध कराया जाएगा, जिन्हें प्रचारित किया जाएगा और इस अवधि के लिए सूचित किया जाएगा कि वे अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.

  • मूल राज्य स्टेशन पर भोजन और पानी प्रदान करेगा और यात्रा के दौरान, प्रवासी श्रमिकों को भोजन और पानी प्रदान करने के लिए रेलवे ट्रेन यात्रा में मूल राज्य भोजन और पानी प्रदान करेंगे. भोजन और पानी उपलब्ध कराने के लिए रेलवे. बसों में भोजन और पानी भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए.
  • राज्य प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण की देखरेख करेगा और यह सुनिश्चित करने के लिए कि पंजीकरण के बाद, वे एक प्रारंभिक तिथि पर ट्रेन या बस में चढ़े.पूरी जानकारी सभी संबंधितों के लिए प्रचारित की जानी चाहिए.
    -सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम केंद्र सरकार पर बिल्कुल नहीं हैं. हम राज्य सरकारों को निर्देश जारी कर रहे हैं. हम आगे निर्देश देते हैं कि उन प्रवासी श्रमिकों को सड़कों पर चलते हुए पाया गया, उन्हें तुरंत शरण में लिया गया और उन्हें भोजन उपलब्ध कराया गया और उन्हें सभी सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए.
    देशभर में फंसे मजदूर जो अपने घर जाने के लिए बसों और ट्रेनों के इंतजार में हैं, उनके लिए भी खाना राज्य सरकारें ही मुहैया करवाएं. मजदूरों को खाना कहां मिलेगा और रजिस्ट्रेशन कहां होगा. इसकी जानकारी प्रसारित की जाए.
    -सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टिकट के पेमेंट के बारे में कंफ्यूजन है और इसी कारण मिडिल मैन ने पूरी तरह से शोषण किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के सबसे पहले उनकी जेब में पैसे होने चाहिए.
    राज्य सरकार प्रवासी मजदूरों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को देखें और यह भी निश्चित करें कि उन्हें घर के सफर के लिए जल्द से जल्द ट्रेन या बस मिले. सारी जानकारियां इस मामले से संबंधित लोगों को दी जाएं. इस मसले पर अगली सुनवाई अब 5 जून को होगी.