फिर निकला सी ए ए कानून का जिन्न, पर ना बना कानून ना मिली किसी को नागरिकता

0
17

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पिछले साल दिल्ली समेत देश के कई भागों में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। इस बार भी सी ए ए कानून को लेकर आवाजें उठना शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने मोदी सरकार के खिलाफ इस कानून को लेकर विरोध तेज कर दिया है।

असम में चुनावी माहौल शुरू हो गया है। राहुल गांधी ने रविवार को असम में चुनाव अभियान की शुरुआत की और सी ए ए कानून को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोल दिया। असम ही नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल में भी सी ए ए कानून को लेकर तनातनी जारी है। पश्चिम बंगाल में भी जल्द ही चुनाव होने वाले हैं, इसलिए वहां ममता बनर्जी सरकार ने भाजपा को रोकने के लिए सीएए का डर लोगों को दिखाना शुरू कर दिया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी भी इस कानून को लेकर बंगाल में जोर शोर से ममता सरकार को कटघरे में खड़ा कर रही है। हालांकि असम में पश्चिम बंगाल जैसी स्थिति नहीं है, वहां बीजेपी इस मुद्दे पर बैकफुट पर है और इस मुद्दे को उछालने से बचती है, क्योंकि वहां इस कानून को लेकर बहुत ज्यादा गुस्सा है इसलिए 2019 दिसंबर में जब यह कानून मोदी सरकार ने संसद से पारित करवाया तो असम में ही इसका सबसे ज्यादा विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। असम में बीजेपी सरकार विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की कोशिश कर रही है लेकिन विपक्षी दल खासकर कांग्रेस जोर शोर से सीएए का मुद्दा उछाल कर भाजपा को हराना चाह रहे हैं। सीएए कानून को लेकर असलियत यह है कि मोदी सरकार ने अभी तक इस कानून को लेकर कोई नियम कानून ही नहीं बनाया है, जिससे किसी को नागरिकता मिल पाए ना नियम बने और ना ही अभी तक किसी भारत के पड़ोसी राज्यों के नागरिकों को इसके तहत नागरिकता मिल पाई है इसलिए इस कानून का जमीन पर कोई असर नहीं है जमीन पर लागू नहीं हुआ। संसद में गृहमंत्री अमित शाह ने यह जरूर कहा है कि वे जल्द ही इस कानून को लागू करने के लिए तैयारी करेंगे लेकिन अभी तक इसे लेकर कोई डेट लाइन सामने नहीं आ पाई। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि यह कानून क्या जमीन पर लागू हो पाएगा या या फिर सिर्फ चुनावी हथियार के तौर पर भाजपा और उसके विपक्षी दल इसका इस्तेमाल करते रहेंगे।