बंगाल में हिंदी भाषियों का दम भी बंगालियों पर पड़ रहा है भारी

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पश्चिम बंगाल में हिंदी बोलने वालों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है क्योंकि उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों से यहां लोग पीढ़ियों से रह रहे हैं और अब यहीं के होकर रह गए हैं, लेकिन उनकी जड़ें अभी इनके गृह राज्यों में बसी हुई हैं जबकि गृह राज्यों में उनके परिवार के लोग वामदल और टीएमसी को ज्यादा जानते भी नहीं है। यह हिंदी भाषी लोग भाजपा, सपा बसपा, आरजेडी और कांग्रेस जैसी पार्टियों को वोट डालते रहे हैं इस बार बंगाल में भाजपा ने पूरी जान फूक रखी है इसलिए यहां हिंदी भाषी लोगों का रुझान बीजेपी की तरफ देख रहा है हिंदी भाषी लोग टीएमसी और वाम दल को वोट देना नहीं चाहते इसलिए भाजपा की ओर झुक रहे हैं और बदलाव की बात कह रहे हैं।

एक अनुमान है कि बंगाल में सवा करोड़ से ज्यादा हिंदी भाषी लोग रहते हैं और इनमें से तीन से चौथाई लोग बंगाल की मतदाता सूची में शामिल हैं।

कोलकाता के बड़े बाजार जैसे बड़े बिजनेस सेंटर में हिंदी वासियों का कब्जा है इसलिए यह तादाद बंगाल के चुनावी गणित को इधर-उधर हिलाने का दम रखती है। हिंदी भाषी लोग भले ही बंगाल में आकर बस गए हैं लेकिन अभी भी अपने गृह राज्य यानी यूपी बिहार झारखंड राजस्थान गुजरात आदि राज्यों में उनके रिश्तेदार रहते हैं और वह वहां आते जाते रहते हैं इसलिए राजनीति पर चर्चा होना स्वभाविक है इन लोगों से बात करते हुए पता चल जाएगा कि यह लोग यूपी और बिहार की पार्टियों से अभी भी करीबी महसूस करते हैं इस समय ज्यादातर हिंदी भाषी राज्यों में भाजपा का बोलबाला है इसलिए बंगाल में ताल ठोक रही भाजपा की तरफ हिंदी भाषी लोग झुक रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनावी दरों की वजह से भी हिंदी भाषी वोटर काफी प्रभावित लग रहा है। हालांकि ममता बनर्जी की टीएमसी भी हिंदी भाषी लोगों के दम को जानती है इसलिए पिछले कुछ दिनों से उसने भी इन लोगों के लिए काफी घोषणा की हैं। छठ पूजा में 2 दिन की सरकार की छुट्टी के अलावा टीएमसी ने अलग से हिंदी समिति गठित की है और इन लोगों से संवाद बनाए रखने की कोशिश की है लिहाजा कुछ हिंदी भाषी ममता बनर्जी के काम की भी तारीफ करते हैं लेकिन भाजपा ने भी इन लोगों पर पूरा फोकस बना कर रखा हुआ है। ममता बनर्जी ने हिंदी भाषियों के वोट के लिए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक का भी समर्थन जुटाने की कोशिश की है।