बर्ड फ्लू : खाने वाले तो खाना बन्द कर देंगे पर बेचने वालों तुम्हारा क्या होगा, इसलिए रखो साफ सफाई

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नॉन वेजिटेरियन खाने वालों के लिए खाने की टेबल की प्लेट में चिकन बहुत अच्छा लगता है लेकिन यह देखना भी जरूरी है कि यह चिकन किस तरह से किस गंदगी में पिंजरे में बंद होते हैं।

कई बार आपने रोड पर देखा होगा कि साइकिल या किसी टैंपो में पिंजरे में बंद मुर्गियां किस गंदी हालत में रखी जाती हैं।

वह कितनी गंदी होती हैं। सिर्फ इन पिंजरों में ही नहीं बल्कि मुर्गी फार्म हाउस में भी गंदगी बहुत ज्यादा होती है।

मुर्गी पालन करने वाले लोग फायदा कमाने के लिए तो आगे रहते हैं लेकिन साफ सफाई का ध्यान रखने में सबसे पीछे रहते हैं।

इसी वजह से बर्ड फ्लू जैसी बीमारियां लंबे समय से हो रही हैं लेकिन मुर्गी पालने वाले और इससे जुड़े अन्य लोग साफ सफाई की तरफ ध्यान बिल्कुल नहीं दे रहे हैं।

इन पर निगरानी रखने वाली सरकार की संस्थाएं भी शायद भ्रष्टाचार में डूबी हुई है और जिन अधिकारियों पर इन मुर्गी फॉर्म में साफ-सफाई करवाने की जिम्मेदारी है, वह शायद पैसे लेकर गंदगी को नजरअंदाज कर रहे हैं।

हमारा यह मकसद यह कतई नहीं है कि हम नॉन वेजिटेरियन लोगों को मीट मुर्गा खाने से रोके लेकिन हम उस गंदगी की तरफ ध्यान दिलाना चाहते हैं जो हम आम तौर पर देख कर भी नजरअंदाज कर देते हैं और खाने के स्वाद के चक्कर में गंदी चीज को हजम कर लेते हैं।

इस मामले में बड़ा सफाई अभियान अभियान चलाने की जरूरत है। साथ ही इस काम से जुड़े लोगों को सोचना होगा कि अगर उन्हें आने वाले समय में पैसे कमाने हैं तो सफाई भी रखनी होगी वरना बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों का आतंक बार-बार आता रहेगा और उनकी रोजी-रोटी भी ऐसे ही खराब होती रहेगी और वह कभी ऊपर नहीं उठ पाएंगे।

वही साफ सफाई की निगरानी करने वाले छोटे से लेकर बड़े अधिकारियों को भी जमीन पर जाकर निगरानी करनी होगी। ना सिर्फ कागजी कार्यवाही से संतुष्ट होकर बैठ जाना चाहिए।

इन अधिकारियों को यह भी सोचना चाहिए कि अगर वह साफ सफाई की निगरानी नहीं करते हैं और पैसा खाकर अपनी आंख बंद कर लेते हैं तो इस बीमारी से वह या उनके करीबी लोग भी चपेट में आ सकते हैं और फिर उनका यह कमाया हुआ गलत पैसा भी काम नहीं आएगा।

सर्दियों के मौसम में नॉन वेजिटेरियन खाने की मांग ज्यादा बढ़ जाती है लोग सर्दी से बचने के लिए मटन मुर्गा और मछली खाते हैं। मटन और मछली बाजार में कुछ ज्यादा महंगी है इसलिए मध्यम और गरीब वर्ग के लोग मुर्गा खाकर ही काम चलाते हैं क्योंकि यह मटन और मछली के मुकाबले काफी सस्ता होता है।

कोरोना लॉकडाउन के दौरान भी मांसाहारी भोजन पर काफी फर्क पड़ा था। कई जगह तो ऐसी भी खबरें आई थी कि लोग फ्री में भी मांसाहारी भोजन खरीदना नहीं चाह रहे थे। इससे मुर्गी मछली और मीट का कारोबार करने वालों को जबरदस्त झटका लगा था अब कोरोना वायरस का खतरा क्योंकि काफी कम हो गया है और लोग भी बाहर निकल रहे हैं तो मांसाहारी भोजन का खान पान बढ़ गया है लेकिन गंदगी की वजह से बीमारियां का आतंक फिर शुरू हो गया ह।

खाने वाले तो अब खाना बंद कर देंगे लेकिन बेचने वाले की रोजी रोटी पर सबसे ज्यादा असर होगा इसलिए उनको ही साफ सफाई का ध्यान रखना पड़ेगा।