बिहार के युवक ने कोरोना को हरा कर बनाई एक कहानी! कोरोना शरीर को नहीं दिमाग को कमजोर बनाता है

0
296

पूरे देश के कोरोना के मामले लगातार सामने अा रहे हैं वहीं बिहार में अब तक कोरोनावायरस के 32 मरीजों की पुष्टि हुई है। इनमें से एक युवक की कोरोना से मौत हो चुकी है, जबकि 9 लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो गए और उन्हें घर भेज दिया गया। हालांकि, अभी मरीजों को 14 दिन घर में भी आइसोलेट रहना होगा।

कोरोना को मात दे चुके सीवान के युवक ने बताया कि “मैं 8 दिन तक पटना के एनएमसीएच में भर्ती रहा। एक बार भी नहीं लगा कि बीमार हूं। कोरोना शरीर पर जितना असर नहीं, डालता उससे ज्यादा यह दिमाग पर असर डालता है। 9 दिन काफी तनाव भरे रहे। मुझे न बुखार हुआ था और न खांसी। अस्पताल में व्यवस्थाएं अच्छी थी। खाने-पीने में कोई दिक्कत नहीं हुई। डॉक्टर की हर बात मानी और हौसला बनाए रखा। 22 मार्च को शारजाह से दिल्ली लौटा। वहां स्क्रीनिंग हुई लेकिन कोरोना के लक्षण नहीं मिले। घर पहुंचने पर 14 दिन क्वारैंटाइन रहने का आदेश दिया गया। लॉकडाउन की वजह से पटना के लिए ट्रेन नहीं मिला और फ्लाइट की भी सारी टिकटें बुक थीं। ऐसे में टैक्सी बुक करके 24 मार्च को दिल्ली से सीवान पहुंचा। 29 मार्च को अचानक एक एंबुलेंस से डॉक्टर और कुछ लोग घर पर आए। उन्होंने कहा कि आपको चलना होगा। परिवार वालों को कुछ नहीं बताया, लेकिन उन्हें भी 14 दिनों तक क्वारैंटाइन कर दिया। 31 मार्च को जब पहली रिपोर्ट पॉजिटिव आई तब समझ में नहीं आया कि मुझे यह बीमारी कैसे हो गई। इसके बाद भी घबराया नहीं। 4 अप्रैल को जब दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आई तब विश्वास हो गया था अब आसानी से जंग जीत लेंगे।
वहीं, युवक के पिता ने कहा कि जब बेटे को अस्पताल वाले लेकर गए तब पूरा परिवार टेंशन में था। 3 दिन तक घर में खाना नहीं बना। जब बेटे की दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आई तब हमने राहत की सांस ली। हम लोग भगवान से प्रार्थना कर रहे थे और यह सफल हो गई।

कोरोना से ठीक हुए दूसरे युवक ने बताया- मैं 22 मार्च को कतर से लौटा था और मेरी तबीयत बिल्कुल ठीक थी। रिपोर्ट आने के बाद पता चला कि मैं भी इस बीमारी के चपेट में आ गया हूं। हिम्मत रखी और 7 दिनों में रिपोर्ट निगेटिव आ गई। मैं खुद को समझाता रहा और हौसला बरकरार रखा। डॉक्टर की सभी बातें मानी और अब स्वस्थ होकर घर जा रहा हूं।