बिहार में कोरोना जैसी नहीं कोई चीज, लोग क्या बड़े नेता नहीं लगा रहे मास्क, पीएम मोदी की सीख दूसरी पार्टी क्या उनके नेता ही नहीं मान रहे

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बिहार ने सभी राजनीतिक दलों ने कोविड-19 को लेकर चुनाव आयोग की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ानी शुरू कर दी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जोर देकर कह रहे हैं कि जब तक दवाई नहीं तब तक ढिलाई नहीं।
2 गज की दूरी है जरूरी पर उनकी पार्टी के नेता ही बड़ी रैलियां कर रहे हैं 2 गज की दूरी क्या 2 इंच की दूरी भी नजर नहीं आ रही है।

बिहार के मोदी की रैली में पीएम मोदी की अपील का असर नहीं

उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की मंगलवार को कैमूर जिले के रामगढ़ में एक चुनावी रैली में 20,000 लोग मौजूद थे।

रैली में हिस्सा लेने वाले न केवल सोशल डिस्टेंसिंग भुलाकर झुंड बनाकर वहां मौजूद थे बल्कि उनमें से तमाम ने मास्क भी नहीं पहना था।

अभी कुछ दिन पहले ही बिहार पहुंचे भूपेंद्र सिंह यादव जो कि भाजपा के महासचिव और राज्यसभा सांसद हैं। बड़े नेता हैं। उनका एक वीडियो ट्विटर पर चल रहा है जिसमें उनकी अगुवाई पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी और पार्टी की उम्मीदवार श्रेयसी सिंह कर रही है, इसमें योगेंद्र सिंह यादव समेत कई नेताओं ने मास्क नहीं पहना है। इस तरह के कई उदाहरण है जब बिहार के ही नहीं बल्कि दिल्ली से आए बड़े नेता भी कोविड-19 प्रोटोकॉल नहीं मान रहे हैं। फिर जनता क्यों मानेगी।

चुनाव आयोग के कागजी दिशा निर्देश

वास्तविक रैलियों के आयोजन के लिए चुनाव आयोग की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक लोगों के बीच कम से कम दो मीटर की दूरी और उन सभी का मास्क पहनना अनिवार्य है। यह दिशानिर्देश कागजी साबित हो रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री की रैली का यही हाल

केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने सोमवार को वैशाली जिले के महुआ में एक विशाल भीड़ को संबोधित किया जिसमें मौजूद भीड़ में से अधिकांश ने मास्क नहीं पहन रखा था।

अब जब भाजपा के नेता ही पीएम मोदी की अपील नहीं मांग रहे तो दूसरी पार्टी के नेता क्यों मानेंगे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बुधवार को चार जगह जनसभाओं में ऐसा ही बुरा हाल था।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव की मंगलवार को नामांकन दाखिल किया तो रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय में केवल दो व्यक्तियों के साथ प्रवेश किया, जैसा कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत अनिवार्य था लेकिन बाहर समर्थकों की भारी भीड़ मौजूद थी। कोई मास्क नहीं कोई सोशल डिस्टेंसिंग नहीं।

डोर टू डोर प्रचार अभियान में भी नेता 100 से अधिक कार्यकर्ताओं का झुंड लेकर चलते हैं।
जबकि आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार डोर-टू-डोर प्रचार अभियान के दौरान किसी उम्मीदवार के साथ सिर्फ चार अन्य लोग ही मौजूद रह सकते हैं।

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