बॉलीवुड से पंगा लेने का शिवसेना का रहा है पुराना शौक, देवानंद, दिलीप कुमार को भी नहीं छोड़ा पर इस बार ऊंट पहाड़ के नीचे

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कंगना रनौत पर शिवसेना का आरोप है कि वह भाजपा के इशारे पर मुंह खोल रही है। वही कंगना ताना मार रही है कि शिवसेना बाल ठाकरे की सेना नहीं रही बल्कि सोनिया सेना बन गई है।

इस तू तू मैं मैं का नतीजा जो चाहे हो लेकिन बॉलीवुड का इतिहास बताता है कि शिवसेना बाल ठाकरे के जमाने से ही बॉलीवुड से पंगा लेती रही है।

देवानंद के जमाने से पंगा

देवानंद, सलमान खान जैसे तमाम स्टार की फिल्में उसके निशाने पर रही हैं और वह अपने दबंग स्टाइल से बॉलीवुड स्टार को धमकाती रही है।

उद्धव और उनके बेटे आदित्य ठाकरे भी बाल ठाकरे की परंपरा को ही आगे बढ़ाते हुए नजर आ रहे हैं।

1971 से शुरुआत

1971 में सबसे पहले बॉलीवुड के खिलाफ शिवसेना का तोड़फोड़ अभियान सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा, जब मातोश्री बाल ठाकरे की पार्टी के गुस्साए कार्यकर्ताओं ने कोहिनूर थिएटर पर लगी फिल्म “तेरे मेरे सपने” को जबरन हटा दिया और मराठी कलाकार कृष्ण कोंडके जो दादा कोंडके के नाम से मशहूर थे उनकी फिल्म जबरन रिलीज करा दी और दिखाना शुरू कर दी।

मराठी मानुष

” तेरे मेरे सपने” में देवानंद हीरो थे और उनके बैनर नवकेतन ने यह फिल्म रिलीज की थी। शिवसेना ने मराठी मानुष का झंडा बुलंद करते हुए इस हिंदी फिल्म को तोड़फोड़ कर हटा दिया था और पूरे महाराष्ट्र में यह संदेश देने की कोशिश की थी की वह मराठी के अलावा हिंदी आदि किसी भाषा को मुंबई या पूरे महाराष्ट्र में पनपने नहीं देंगे।

पार्टी का फिल्म डिवीजन या वसूली

बताया जाता है कि दादा कोंडके ने तो पार्टी की फिल्म डिवीजन का ही गठन करवा दिया था। उस समय शिवसेना शायद पहली पार्टी थी, जिसने अपना अलग फिल्म विभाग खोल दिया था।

मुंबई के कुछ पत्रकार तो यहां तक बताते हैं कि यह फिल्म विभाग के जरिए शिवसेना के गुंडे जैसे आक्रमक मिजाज वाले कार्यकर्ता फिल्म इंडस्ट्री से वसूली भी करते थे और अगर कोई आनाकानी करता था तो फिल्म के शूटिंग सेट पर जाकर तोड़फोड़ मचा देते थे।

हालांकि शिवसेना से लंबे समय से जुड़े नेता इस बात को खारिज करते हैं और कहते हैं कि फिल्म डिवीजन का गठन मराठी भाषा वाली फिल्मों को मुंबई में रुतबा देने के लिए गठित किया गया था और मुंबई में मराठी लोगो की संख्या ज्यादा होने के बावजूद सिनेमा हॉल में फिल्में हिंदी आदि भाषा की लगती थी।

उस समय हिंदी फिल्म के प्रोड्यूसर पूरे 1 महीने के लिए ही हिंदी फिल्मों के लिए सिनेमा को बुक कर लेते थे जिससे मराठी लोग अपनी भाषा में मनोरंजन नहीं कर पाते थे इसलिए शिवसेना ने यह अभियान चलाया था।

मुंबई रहना है तो झुकना पड़ेगा

शिवसेना के इस अभियान की वजह से बाल ठाकरे का बॉलीवुड में दबदबा हो गया। कई बड़े स्टार उनके घर मातोश्री में उनके दर्शन करने जाते थे और माना जाता था कि अगर किसी बॉलीवुड हस्ती को अगर मुंबई में रहना था तो उसे शिवसेना के आगे झुकना होता था।

बीएमसी पर कब्जा

मुंबई के पत्रकार कहते हैं कि शिवसेना और सालों से मुंबई की नगर पालिका पर कब्जा रहा है। इस वजह से भी फिल्म निर्माताओं को हर तरह की अनुमति के लिए उनके पास जाना होता है इसलिए लगभग सारा बॉलीवुड उनकी गुड बुक में शामिल होने के लिए तैयार रहता है। उनसे पंगा लेना नहीं चाहता।

बताया जाता है कि 1993 में जब मुंबई दंगों पर मणि रत्नम की फिल्म “बॉम्बे” को रिलीज होना था तो रिलीज होने से पहले बाल ठाकरे ने फिल्म में कुछ बदलाव बताए थे जिसे फिल्म में शामिल किया गया था। माना जाता है कि अगर ऐसा नहीं किया जाता तो मुंबई में फिल्म रिलीज ही नहीं होती।

कई बड़ी फिल्में शिवसेना और उसके बड़े नेताओं के गुस्से का शिकार हो चुकी है। 2017 में सलमान खान की “टाइगर जिंदा है” फिल्म के खिलाफ शिवसेना सड़क पर उतर गए थे। शिवसेना के गुस्से की वजह यह थी कि इस फिल्म में मल्टीप्लेक्स पहले से ही बुक करा लिए थे और मराठी फिल्मों के लिए कोई जगह नहीं बची थी।

2010 में “माय नेम इज खान” फिल्म को भी शिवसेना ने इसलिए विरोध किया था क्योंकि फिल्म के हीरो शाहरुख खान ने आईपीएल में पाकिस्तान क्रिकेटर को सपोर्ट किया था।

इसी तरह 1998 में दीपा मेहता की फायर जिसमें दो औरतों के समलैंगिक होने की कहानी दिखाई गई थी, उसका विरोध शिवसेना ने किया था। वहीं 2006 में भी फिल्म ” वाटर” का विरोध किया गया था। शिवसेना का आरोप था कि इस फिल्म से हिंदू भावनाओं को आघात पहुंचता है।

2015 में भी शिवसेना ने पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली को मुंबई में शो करने नहीं दिया था, वही पाकिस्तानी कलाकार फवाद खान और माहिरा खान की फिल्मों को भी रिलीज होने से रोका था।

हालांकि शिवसेना सुप्रीमो रहे बाल ठाकरे का बॉलीवुड की बड़ी हस्तियां दिलीप कुमार देवानंद अमिताभ बच्चन सुनील दत्त मनोज कुमार राज कपूर ऋषि कपूर शशि कपूर आदि कई स्टार के साथ अच्छा समानता अमिताभ बच्चन ने तो ठाकरे के साथ अपने करीबी संबंधों को बताते हुए एक बार कहा था कि जब बोफोर्स दलाली मामले में इनका और ठाकरे का नाम आया था कि किस तरह से उन्होंने दोनों ने मिलकर इस समस्या से छुटकारा पाया था।

लेकिन इस बार उद्धव को दिया सीधा चैलेंज

बाल ठाकरे के समय में तो किसी बॉलीवुड स्टार ने इस तरह की चुनौती नहीं दी, जिस तरह से कंगना ने उद्धव ठाकरे को ललकारा है, वह भी जब ठाकरे राज्य के मुख्यमंत्री हैं। कंगना ने बोला था, “उद्धव ठाकरे तुझे क्या लगता है आज मेरा घर टूटा है कल तेरा घमंड टूटेगा।” शिवसेना को करीब से जाने वाले कहते हैं, यह सुनकर ठाकरे परिवार की जान जल गई होगी लेकिन अगर बाल ठाकरे होते तो शायद कंगना ऐसी हिमाकत नहीं कर पाती।

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