ब्रेड , बिस्किट और मैदे से बनी चीजें सस्ती होने के कम आसार, लॉक डाउन में राहत मिलने के आसार कम

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वजन बढ़ाकर मिल सकता है ग्राहकों को फायदा

नई दिल्ली।

लोग अखबारों और ऑनलाइन मीडिया में पढ़कर यह उम्मीद लगा कर बैठ गए हैं कि ब्रेड, बिस्किट और मैदे से बनी दूसरी चीजें जल्दी ही सस्ती हो सकती हैं, क्योंकि गेहूं के दाम में लगातार गिरावट आ रही है। लेकिन इन उत्पादों को बनाने वाली कंपनियों के लोगों का कहना है कि लॉकडाउन में काम धंधा मंदा रहा, इसलिए उत्पादों के दामों में कमी करने की कम संभावना है क्योंकि इससे घाटा और बढ़ सकता है।

दाम की बजाय वजन बढ़ाकर दे सकते है फायदा

जानकारों का कहना है कि सामान के दाम करने की बजाय उतने ही दाम में उत्पाद के वजन में बढ़ोतरी करके ग्राहकों को फायदा दिया जा सकता है लेकिन कीमत में कटौती करने की संभावना कम है। जानकारों का कहना है कि अगर सरकार बहुत दबाव डालती है तो वजन में इजाफा करके ग्राहकों को फायदा दिया जा सकता है, जैसे ब्रेड के पैकेट में अतिरिक्त ब्रेड दी जा सकती है। साथ ही बिस्किट्स की संख्या भी बढ़ा कर वजन बढ़ाया जा सकता है। लेकिन फिलहाल अभी कीमत में कमी हो या वजन में बढ़ोतरी की संभावना बहुत कम है।

दरअसल पिछले 1 महीने में गेहूं के दामों में भारी गिरावट देखने को मिली है। दिल्ली में गेहूं एमएसपी से काफी नीचे 1870 रूपए प्रति क्विंटल बिक रहा है । मांग में कमी और रिकॉर्ड प्रोडक्शन की वजह से कीमतों में गिरावट आई है।

जानकारों के मुताबिक गेहूं की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे दिल्ली में एमएसपी से नीचे गेहूं बिक रहा है। दिल्ली में 1870 से 1875 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं का भाव है।

सरकार ने इस साल गेहूं का 1925 प्रति क्विंटल एमएसपी रखा है। पिछले 1 महीने में कीमतों में 125 से ₹150 की गिरावट आई है। जहां गेहू 1.5 रुपए तो आटा ₹2 सस्ता हुआ है। इस साल 106.21 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन होगा, जो कि पिछले साल से 3 लाख टन ज्यादा है।

होटल बन्द हैं जिसकी वजह से बेकरी और मिलों से मांग में भारी कमी है। दिल्ली की आम आदमी सरकार राशन में गेहूं मुहैया करा रही है। इस साल एफसीआई ने 40 लाख मिलियन टन का अधिग्रहण किया है।