भारत ने ऐसा चक्रव्यूह रचा कि चीन चारों अपने ही चाल में घिर गया!,

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पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास पिछले कुछ दिनों से चीन की तरफ से सैन्य गतिविधियों के बढ़ने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति है. भारत के अपनी सीमा के अंदर सड़क निर्माण करने पर चीन विरोध जता रहा है. चीन की हरकतों को लेकर भारत भी अलर्ट मोड में है. दोनों देशों की सेनाओं ने हाल में सीमा पर गतिविधियां बढ़ीं हैं. माना जा रहा है कि 2017 में उपजे डोकलाम विवाद जैसी स्थिति फिर से दोनों देशों के बीच उत्पन्न हुई है.

चीन चारों तरफ से घिर गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा चक्रव्यूह बनाया है, जिसमें से निकलना चीन के लिए मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन लगता है क्योंकि ये घेराबंदी सिर्फ लद्दाख में सेना की टुकड़ी भेजने तक नहीं, बल्कि उससे कहीं ज्यादा आगे तक की है. कोरोना वायरस को विश्व में फैलाने के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. चीन एक ऐसा देश है जिसकी दोस्ती किसी को नहीं दिखती लेकिन दुश्मनी साफ-साफ प्रकट हो जाती है. वो हमेशा अपने खुराफातों की ऐसी चाल चलता है कि दूसरे देश उसमें फंसकर चकरघिन्नी बन जाएं. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत ने तय कर लिया है कि वो चीन की किसी भी चाल को कामयाब नहीं होने देगा. चीन ने अपने सैनिकों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लामबंद करते हुए भारत को धोखा देने की कोशिश में पैंतरेबाजी का भी इस्तेमाल किया. इसने अपने क्षेत्र में युद्ध के लिए अपने सैनिकों को इन्गेज किया और उन्हें एक एयर बेस प्रोजेक्ट के लिए ट्रकों से भारतीय सीमा के बेहद करीब से ले जाया गया.
सैनिकों की इस भारी भीड़ के कारण, चीनी भी कुछ देर के लिए आश्चर्य में पड़ गए थे, क्योंकि इन क्षेत्रों में तैनात भारतीय सुरक्षा बलों की तुलना में उनके पास ज्यादा संख्यात्मक बल हैं. भले ही चीनी सेना ल्हासा सैन्य जिले के तहत सीमा पर अपने अभ्यास में हिस्सा ले रही थी, लेकिन उन्होंने तेजी से अपने सैनिकों को भारी वाहनों में भारतीय सीमा के पास भेजा था.
चीन अपनी ताकत दिखाने में मशगूल है लेकिन अमेरिका के बहाने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चक्रव्यूह के दूसरे व्यूह पर आते हैं जिसमें चीन को कूटनीतिक रूप से घेरना है. चीन ने ताइवान की आजादी का अतिक्रमण कर रखा है. लेकिन दुश्मन का दुश्मन दोस्त की कूटनीति का इस्तेमाल करते हुए भारत ने ताइवान का कूटनीतिक समर्थन कर दिया. बुधवार को ताइवन की नई राष्ट्रपति साइ इंग वेन के शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी के दो सांसदों मीनाक्षी लेखी और राहुल कस्वां ने ऑनलाइन शिरकत की और उनको बधाई दी. भारत जैसे देश के समर्थन से ताइवान को ताकत मिली है जो देर सबेर चीन के खिलाफ काम आ सकती है. इससे भी चीन तिलमिलाया हुआ है.
पूर्वी लद्दाख के तीन केंद्रों पर चीन ने घुसपैठ कर ली. अपनी सैनिक टुकड़ी के साथ डट गया. उसने सोचा होगा कि भारत कोई पलटवार नहीं करेगा लेकिन हिंदुस्तान की सेना जा डटी. भारत के इस तेवर से चीन तिलमिलाया हुआ है. जिनपिंग ने अपने सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक करके युद्ध के लिए तैयार रहने की बात की है.

युद्ध की तैयारी
चीन के राष्ट्रपति ने किसी देश का नाम नहीं लिया कि वो किससे युद्ध के लिए तैयारी कर रहे हैं. वैसे चीन का सबसे बड़ा कूटनीतिक युद्ध तो अमेरिका से चल रहा है जो कोरोना पर शुरू हुआ है. लेकिन जब चीन की हरकतों पर भारत ने अपने तेवर कड़े किए तो अमेरिका को भी लग गया कि हालात बदल रहे हैं. ट्रंप ने ट्वीट किया कि हमने भारत और चीन दोनों को सूचित किया है कि उनके तीखे सीमा विवाद पर अमेरिका मध्यस्थता करने को तैयार है.
दरअसल, कोरोना के संक्रमण के दौरान जहां भारत ने अपना पूरा ध्यान इस महामारी से निपटने में लगाया है, वहीं चीन ने एलएसी पर भारतीय सीमा में करीब 5 हजार सैनिकों की तैनाती बहुत तेजी से कर दी. लेकिन भारत ने जल्द ही अपनी फौज की तैनाती कर दी. अब भारत की नाराजगी और अमेरिका के गुस्से के बीच चीन अलग थलग पड़ने लगा है. दुनिया के तमाम देश उससे किनारा कर रहे हैं, बावजूद इसके चीन अपने रक्षा बजट में वृद्धि कर रहा है.
हॉन्गकॉन्ग में भी नाराजगी
चीन के खिलाफ हॉन्गकॉन्ग में भी भारी नाराजगी है. हॉन्गकॉन्ग में हो रहे हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच चीन ने उसके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून संसद में पेश किया है. जबकि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत हॉन्गकॉन्ग के लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थन करता है. वैसे प्रधानमंत्री मोदी बहुत पहले ही अपने लोकतांत्रिक फलसफे को दुनिया के सामने रख चुके हैं.
चीन को घेरने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के चक्रव्यूह का तीसरा व्यूह आर्थिक मोर्चा है. कोरोना ने दुनिया में चीन की साख को मिट्टी में मिला दिया है. वहां पर कोई भी कंपनी काम नहीं करना चाहती. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले से ही दुनिया से कह रहे हैं कि चीन को अलग-थलग कर देना है. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना कहे ही बहुत कुछ इशारा तब कर दिया था जब आत्मनिर्भर भारत का नारा दिया.
हवाई क्षेत्र के लिए अधिग्रहण
5-6 मई के आसपास, चीनी सैनिकों ने एलएसी पर निर्माण करना शुरू कर दिया और आक्रामक तरीके से काम को आगे बढ़ाया. कुछ भारतीय क्षेत्रों में चल रही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर आपत्ति भी जताई गई और उन पर हिस्सेदारी का दावा भी किया गया. सूत्रों ने कहा कि सीमा पर उनकी ओर से तैयार चीनी बुनियादी ढांचे को दो दशक से अधिक हो गए हैं और इस कारण इलाके में वे तेजी से मदद जुटा सकते हैं. पश्चिमी राजमार्ग और वहां की राज्य सड़कों की कनेक्टिविटी ने भी चीन को तेजी से तैनाती करने में मदद की है. हालांकि बुनियादी ढांचे के संदर्भ में चीन को फायदा यह मिला कि कोरोना वायरस के प्रसार के मद्देनजर लगाए पाबंदियों के कारण भारत का काम प्रभावित हुआ था. आस-पास के क्षेत्रों से अधिक ट्रकों को बुलाया गया था जहां पीएलए द्वारा एक हवाई क्षेत्र का अधिग्रहण किया जा रहा था और इसके विस्तार के लिए कीचड़ की आपूर्ति की जा रही थी, जिसकी आड़ में भारी वाहनों से सैनिकों को भारतीय सीमा में भेजा जा सके.
चीन ने तेजी से एलएसी के करीब 5,000 सैनिकों और भारतीय क्षेत्र में कुछ स्थानों पर तैनात किया है.
भारत ने यह भी तय किया है कि वह लद्दाख क्षेत्र में अपनी बुनियादी सुविधाओं की परियोजनाओं में बाधा डालने के लिए किसी भी बाहरी आपत्ति की अनुमति नहीं देगा, जिसमें काराकोरम मार्ग पर क्लोजेस्ट बिंदु तक एक सड़क शामिल है.

भारत और चीन में बने तनावपूर्ण माहौल में दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने के सवाल पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अगर वे ऐसा सोचते हैं कि मेरे मध्यस्थ होने या मध्यस्थता करने से कोई मदद मिलती है तो मैं ऐसा जरुर करूंगा. हालांकि भारत ने पहले ही ट्रंप की मध्यस्थता का सुझाव ठुकरा दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति च्रंप की पेशकश पर भारत अपनी प्रतिक्रिया दे चुका है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है. शांति से मुद्दे को सुलझाने के लिए हम चीन के संपर्क में हैं. . उन्होंने आगे कहा, ‘मैं आपको बता सकता हूं कि मैंने प्रधानमंत्री मोदी से बात की है, लेकिन चीन के साथ अभी जो विवाद बना हुआ है, उसको लेकर वह अच्छे मूड में नहीं हैं.’मैं आपके प्रधानमंत्री को बहुत पसंद करता हूं. वह बेहद सज्जन पुरुष हैं. साथ ही उन्होंने एक बार फिर मध्यस्थता करने की बात दोहराया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत और चीन के बीच बड़ा संघर्ष चल रहा है, 1.4 बिलियन आबादी वाले 2 बड़े देश जिनकी सैन्य ताकत बेहद मजबूत है. भारत खुश नहीं है और शायद चीन भी खुश नहीं है’
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तब कहा था कि अमेरिका, भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के मुद्दे पर मध्यस्थता करने के लिए तैयार है. इस महीने की शुरुआत से ही लद्दाख में चीनी सैनिक और भारतीय सैनिक आमने-सामने हैं, चीन की ओर से लगातार सैनिकों की संख्या बढ़ाने और बेस बनाने की खबरें आ रही हैं. ऐसे में भारत भी पूरी तरह से मुस्तैद है और शीर्ष स्तर पर इसको लेकर मंथन चल रहा है.