राफेल के लिए चुनीं गई पहली महिला पायलट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह की स्टोरी है बहुत रोचक

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वायु सेना की ओर से फाइटर पायलट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह का राफेल विमान की पहली महिला पायलट के रूप में चयन हुआ है।
वह काशी से हैं।

यहां तक पहुंचने में शिवांगी को किस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा आइए जानते हैं उनकी पूरी स्टोरी।

वायुसेना में पायलट बनने का उनका सपना था। वह शुरू से ही पढ़ने में होनहार थीं।

शुरुआती स्कूलिंग के बाद उच्च शिक्षा के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) पढ़ने गई थीं।

बीएचयू में ही वह नेशनल कैडेट कोर में 7 यूपी एयर स्क्वाड्रन का हिस्सा थीं।

बीएचयू से 2013 से 2015 तक एनसीसी कैडेट रहीं।

साथ ही सनबीम भगवानपुर से बीएससी किया।

26 जनवरी के परेड में भी शामिल

शिवांगी दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में 2013 में उत्तर प्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

उन्होंने 2016 में प्रशिक्षण के लिए वायु सेना अकादमी ज्वाइन की थी।

पिछले 16 दिसंबर 2017 को ही हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी में उसे फाइटर पायलट का तमगा मिला था।

हैदराबाद में ट्रेनिंग पूरी होने के बाद शिवांगी इस समय मिग-21 की फाइटर पायलट हैं। 

शिवांगी की पोस्टिंग अभी राजस्थान में है।

शिवांगी सिंह का घर काशी में फुलवरिया में हैं।

शिवांगी की मां सीमा सिंह गृहिणी हैं और भाई मयंक बनारस में 12वीं का छात्र है।   

वह देश की पहली महिला फ्लाइंग लेफ्टिनेंट हैं। 

वह बास्केटबॉल की नेशनल खिलाड़ी भी रही हैं।

एनसीसी में राजपथ पर 2013 में परेड करने के बाद उसने बांग्लादेश का भी दौरा किया।

वहां भी एनसीसी में बेस्ट कैडेट चुनी गईं।

फ्लाइंग लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह के छोटे भाई मयंक का सेना में जाने का सपना है।

बातचीत में मयंक ने बताया कि बहन को एनसीसी कैडेट से लेकर वायु सेना में चयन होने के बाद वर्दी पहन कर देखने के बाद से ही उसने सेना की वर्दी पहनकर सेवा करने की ठानी है और इसके लिए तैयारी भी कर रहा है।

डब्ल्यू एच स्मिथ स्कूल से 12वीं के छात्र मयंक ने बताया कि इंटरमीडिएट के बाद एनडीए के माध्यम से देश सेवा करने का सपना पूरा करेगा।