राहुल और कैप्टन का पुराना बैर फिर आ गया सामने

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राजस्थान में सचिन पायलट को पार्टी में वापस लाने को लेकर गांधी परिवार ने एड़ी चोटी का जोर लगा लिया लेकिन पंजाब में इसके ठीक उलट हो रहा है जहां राहुल गांधी की माने जाने वाली टीम पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पर निशाना साध रही है। यहां हाईकमान मुख दर्शक बना हुआ है और बीच बचाव नहीं कर रहा है जैसे मानो उसके इशारे पर ही अमरिंदर पर निशाना साधा जा रहा हो।

इस महीने की शुरुआत में पंजाब के सीमा से जुड़े 3 जिलों में जहरीली शराब पीने से 121 लोगों की मौत हो गई। इस घटना पर जो काम विपक्ष अकाली दल और भाजपा को करना था वह काम कांग्रेस के नेताओं ने कर दिया, जो राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं।

शुरुआत पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने अमरिंदर पर निशाना साथ कर की और राज्य के राज्यपाल से जाकर अपनी ही सरकार की लापरवाही के बारे में शिकायत कर दी।

अमरिंदर की टांग खिंचाई में बाजवा सिर्फ अकेले नहीं थे। इसमें यूथ कांग्रेस के दो पूर्व नेता भी शामिल है। लुधियाना से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू और राज्य के विधायक अमरिंदर सिंह राजा भी पंजाब के सीएम विरोधी अभियान में शामिल हो गए। इसके बाद एक और सांसद शमशेर सिंह दूलो भी इस टीम में शामिल हो गए।

बाजवा, बिट्टू और राजा यह तीनों तो राहुल गांधी के खासम खास माने जाते हैं। इसलिए दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक कांग्रेस के नेताओं में इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं है कि गांधी परिवार अमरिंदर सिंह के काम करने के अंदाज से खुश नहीं हैं और हाईकमान को लगता है कि मुख्यमंत्री उसकी सुनते तक नहीं है। इसलिए यह पूरा प्रपंच छेड़ा गया है और 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले जान मुझकर छेड़ा गया है, ताकि अमरिंदर को यह एहसास दिला दिया जाए की वह अभी से मान कर ना बैठ जाए कि अगले चुनाव में भी उनको ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाने के लिए हाईकमान तैयार हो जाएगा।

कैप्टन और राहुल गांधी के बीच बैर है पुराना

हालांकि कैप्टन इतनी आसानी से हार मानने वाले नहीं हैं और उन्होंने बाजवा के खिलाफ आग उगलना भी शुरू कर दिया है। उन्होंने बाजवा की सिक्योरिटी भी घटा दी है। कैप्टन ने अपने सिपहसलार पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ को भी हमला बोलने के लिए मैदान में उतार दिया है। जाखड़ ने बाजवा के खिलाफ एक्शन लेने के लिए सीधे सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर मांग कर डाली है।

अमरिंदर सिंह और राहुल गांधी के बीच खट्टे रिश्ते आज की बात नहीं है। पार्टी के कई नेता बताते हैं कि अमरिंदर राहुल गांधी को अभी भी राजनीति में बच्चा मानते हैं और जितना सोनिया गांधी को वह तवज्जो देते हैं उतना राहुल गांधी को नहीं देते हैं। कांग्रेस में यह खुला सच है।

सूत्रों के मुताबिक एक बार कांग्रेस के नेताओं ने अमरिंदर को सलाह दी कि वह पार्टी के पूर्व अध्यक्ष को ” राहुल जी ” कह कर संबोधित करें तो इस पर अमरिंदर ने सवाल किया, ” लेकिन क्यों मैं उसके पिताजी (स्वर्गीय राजीव गांधी) का भी दून स्कूल में सीनियर रह चुका हूं
, उसे तो मुझे अंकल बोलना चाहिए। ”

2015 के विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी प्रताप सिंह बाजवा को पंजाब के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट करना चाहते थे और अमरिंदर को राज्यों की सियासत से किनारे करना चाहते थे लेकिन कैप्टन की पार्टी में पकड़ होने की वजह से हाईकमान को अपनी योजना से पीछे हटना पड़ा और अमरिंदर को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार के तौर पर दिखाना पड़ा।

उस समय बाजवा को प्रदेश अध्यक्ष पद की कुर्सी से इस्तीफा देना पड़ा था और उसके बाद अमरिंदर को अध्यक्ष बनाया गया था। यह सब हाईकमान की इच्छा के बगैर हुआ था क्योंकि यह लग रहा था कि अगर अमरिंदर को पार्टी की कमान नहीं सौंपी जाएगी तो विधानसभा चुनाव में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है और इसका सीधा फायदा राज्य में जड़े जमा रही आम आदमी पार्टी को मिल सकता है।

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