लॉकडाउन से पहले सारी व्यवस्थाएं हो जाती तो प्रवासी मजदूरों को यह दिन नहीं देखना पड़ता: अजय माकन!

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कोंग्रेस के वरिष्ठ नेता “अजय माकन” ने वीडियो कांफ्रेंस किया। उन्होंने कहा कोंग्रेस ने कल ही अनाउंस किया था कि आज 11 बजे से 2 बजे तक “स्पीक अप इंडिया” पूरे देश भर में कांग्रेस के 50 लाख से ज्यादा सिंपेथाइजर कार्यकर्ता, हमारे ऑफिस बियरर्स, सब लोग मिलकर के सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्मस के ऊपर जनता की आवाज को उठाएंगे और सरकार तक मजदूरों की दुःख पहुंचाने की कोशिश करेंगे। इस कैंपेन का रिजल्ट है, आप लोगों से शेयर करना चाहते हैं और जो इस देश का साथ मिला है, उससे बहुत उत्साहित हैं। हमे उम्मीद हैं कि सरकार अब तो जागेगी। “स्पीक अप इंडिया” हैश टैग वर्ल्ड वाइड, पूरी दुनिया के अंदर नंबर वन ट्रेंड किया। आज सुबह 10 बजे से लेकर 5 बजे तक हमारे देश में तो वो नंबर ट्रेंड किया ही किया। लेकिन वर्ल्ड वाइड नंबर वन ट्रेंड “स्पीक अप इंडिया” ने किया। ये अपने आप में दर्शाता है कि किस तरीके से पूरी दुनिया भर में इसकी चर्चा हुई और किस तरीके से लोग आगे बढ़कर सरकार को बता रहे हैं, उनकी परेशानियाँ और सरकार को कह रहे हैं कि आप हमारी बात सुनें।

उन्होंने कहा कि पूरे देशभर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जो लिंक दिए हैं, उसको इकट्ठा किया है, सभी प्लेटफॉर्मस के अंदर तो 57.3 लाख, 57 लाख से भी ज्यादा कार्यकर्ताओं के और नेताओं के, हमारे सीनियर लीडर्स के लिंक्स अभी। तक हमारे सोशल मीडिया डिपार्टमेंट में सब्मिट हो चुके हैं और सभी ने मिलकर, हमारे सोशल मीडिया डिपार्टमेंट ने इसको जो कैलकुलेट किया है, तो 10 करोड़ से ज्यादा लोगों के बीच पहुंची है। हमारे 57 लाख से भी ज्यादा कांग्रेस के सिंपेथाइजर, कार्यकर्ताओं ने लोगों के बीच में जाकर उसकी बात की है। अगर सही मायने में “स्पीक अप इंडिया” कैंपेन का नतीजा, रिजल्ट बताया जाए तो ये एक वर्चुअल रियलिटी 10 करोड़ लोगों की हमारे देश के अंदर, देश की सरकार को जगाने के लिए इस तरीके से हुई है। हम लोग यह मानते हैं कि 10 करोड़ लोगों की एक तरीके से वर्चुअल रैली, एक तरीके से कांग्रेस पार्टी ने एक आयोजन किया है। इस सोशल मीडिया कैंपेन के माध्यम से और 10 करोड़ लोग इससे हम लोग रीच कर पाएं हैं और इस पूरे के पूरे हमारे कैंपेन के अंदर 10 करोड़ लोगों ने इसमें हिस्सा लिया है।

उन्होंने कहा कि अगर देश की साधारण जनता ने इसमें हिस्सा नहीं लिया होता तो 10 करोड़ लोगों की इतनी बड़ी वर्चुअल रैली कभी भी सक्सेसफुल नहीं होती । देश के कोने-कोने में अलग-अलग जगहों में फैले हुए छोटे से छोटे कार्यकर्ताओं से लेकर वरिष्ठ से वरिष्ट हमारे नेता, हमारे पदाधिकारी, हमारे वर्किंग कमेटी के मेम्बर, हमारे एआईसीसी के पदाधिकारीगण, हमारे एआईसीसी के प्रेसीडेंट, हमारे फॉर्मर प्रेसीडेंट, हमारे सभी जनरल सेक्रेटरी, सभी हमारे कांग्रेस वर्किंग कमेटी के मेम्बर, हमारे सभी पीसीसी के प्रेसीडेंट्स और ऑफिस बियरर्स, हमारे फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन, सारे के सारे हमारे फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन, चाहे यूथ कांग्रेस, महिला कांग्रेस, एनएसयूआई और सारे सैल हमारे जितने भी हैं, सभी के सभी पदाधिकारियों ने मिलकर इस 10 करोड़ लोगों की वर्चुअल रियैलिटी को सफलतापूर्वक जो अंजाम दिया है, “स्पीक अप इंडिया” के कार्यक्रम के माध्यम से, “स्पीक अप इंडिया” के माध्यम से अपनी आवाज और जनता की आवाज को जो बुलंद किया है, कांग्रेस पार्टी उन सबका बहुत-बहुत धन्यवाद करना चाहती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा में सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब लोग होते हैं, गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले इस समूह के लिए “स्पीक अप इंडिया” का कार्यक्रम था और हम उम्मीद करते हैं कि “स्पीक अप इंडिया” के बाद में जो मांगे हमारे कार्यकर्ताओं ने, देश की जनता ने, भारत सरकार के सामने रखी है, उसको भारत सरकार जल्द से जल्द पूरा करेगी। हमारे देश के नागरिकों ने इसमें लाइव हिस्सा लिया है, हम उन तमाम कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का, नेताओं का, तमाम फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन का, पीसीसी प्रेसीडेंट्स का और सैल्स का, सबका हम धन्यवाद करते हैं।

इस बीच करेंट रिव्यू ने अजय माकन से सुप्रीम कोर्ट में मजदूरों के विषय पर हुई सुनवाई पर सवाल किया कि आज सुप्रीम कोर्ट में मजदूरों को लेकर तीखी बहस हुई और कोर्ट ने सभी विषयों पर संज्ञान लिया है, और कोर्ट में अगली सुनवाई तक पेश करने को कहा है, इसके ऊपर आपके क्या विचार हैं?

अजय माकन ने कहा कि हमारे प्रवासी मजदूर देशभर में अलग-अलग प्रांतो में है, सबसे प्रमुख जिम्मेदारी इसके अंदर रेलवे मंत्रालय की बन जाती है और रेलवे मिनिस्ट्री को अपने आप में खुद इसमें आगे बढ़कर हिस्सा लेकर इनको “फ्री ऑफ कोस्ट”, सम्मानपूर्वक पूरी की पूरी फैसिलिटीज के साथ में लोगों को छोड़ने की व्यवस्था करनी चाहिए थी। दुर्भाग्यवश, रेलवे मिनिस्ट्री ने इसके लिए पहले दिन से ही पैसे मांगने शुरु कर दिए। एक स्टेट गवर्मेंट ने दूसरी स्टेट गवर्मेंट के ऊपर डालना शुरु कर दिया। कई जगहों पर प्रवासी मजदूरों से पैसा लिया जाना शुरु हो गया। अगर रेलवे मिनिस्ट्री इसकी नोडल मिनिस्ट्री बनकर इसको खुद अपने ऊपर लेकर साथ ही भारत सरकार रेलवे मिनिस्ट्री को पैसा पूरा अपने तरफ से मुआवजा करती तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता। उन्होंने कहा कि रेलवे का बजट भी जो “मेन बजट” है, उसका हिस्सा बन गया है। पहले रेलवे बजट अलग होता था। अब निर्मला सीतारमण रेलवे बजट दे सकती हैं, तो श वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस कार्य के लिए रेलवे को बजट क्यों नहीं दे सकती?

अगर ये पैसा केन्द्र सरकार से सीधा रेलवे को जाता और रेलवे इस चीज में मौजूद एक मिनिस्ट्री बनकर इसको करती, किसी से पैसा नहीं मांगा जाता और इसको सही तरह से इस्तमाल किया जाता तो यह दिक्कत नहीं अाती। अब हम लोग इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर 2-2, 3-3 दिनों तक भारत भ्रमण करते हुए रेलवे को देख रहे हैं, तो ये समस्या सीधे-सीधे दूर हो सकती थी। अगर इसको तरीके से, रेलवे मिनिस्ट्री करती, बल्कि हम तो ये कहते हैं कि इसको लॉकडाउन शुरु होने से पहले इस समस्या का हल होना चाहिए था। लॉकडाउन शुरु होने के बाद में जबरदस्ती, जरुरी तौर से, इसको हमारे प्रवासी मजदूरों के ऊपर बोझ डालकर उनको मजबूर किया गया कि वो जाएं। अगर इन सारी समस्याओं का हल पहले लॉकडाउन के पहले ही केंद्र सरकार निकाल लेती तो आज प्रवासी मजदूरों को इतना कष्ट नहीं झेलना पड़ता। यह सारी व्यवस्थाएं लॉकडाउन से पहले हो जाती तो आज यह दिन देखने की नौबत नहीं मिलती।