सरकारी स्कूलों को बंद कर बच्चों का भविष्य प्राइवेट को देने पर जुट गई सरकारें, बीजेपी वाली राज्य सरकारें आगे

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कई राज्य सरकारें अपनी जिम्मेदारी को खत्म कर सरकारी स्कूलों को तेजी से बंद कर रही है और बच्चों की शिक्षा को प्राइवेट स्कूलों के हाथों में देने के लिए पूरा माहौल तैयार कर रही है।

पिछले कुछ सालों में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना जैसे राज्यों में हजारों स्कूल सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। इन सरकारों का तर्क है कि शिक्षकों की कमी और छात्रों की भी कमी की वजह से स्कूलों पर ताले लगा दिए गए हैं।

एक गैर लाभकारी संस्था सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के मुताबिक 2010 से 2014 के बीच एक लाख से ज्यादा स्कूलों पर ताले जड़े गए। यह सब अप्रैल 2010 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद शुरू हुआ इनमें उत्तराखंड, तेलंगाना, हरियाणा राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश जैसे तमाम राज्य शामिल हैं।

अभी कुछ हफ्ते पहले ही हरियाणा में 1000 से ज्यादा प्राइमरी मिडिल सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए।

वहीं उत्तराखंड में भी कुछ दिन पहले खबर आई कि 700 स्कूल बंद कर दिए गए हैं इसके अलावा मध्य प्रदेश में भाजपा की शिवराज सरकार ने 12876 सरकारी स्कूलों में ताला लगा दिया है और जिन जगहों के स्कूल बंद किए गए हैं वहां वह आदिवासी बहुल इलाके हैं, जहां गरीब बच्चे स्कूल जाते थे उत्तर प्रदेश में भी ऐसा देखने को मिला है।

गोंडा में 466 परिषदीय स्कूलों को आपस में मिलाकर शुरू किया गया है गाजियाबाद में 100 से ज्यादा स्कूल मर्ज किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि स्कूलों को आपस में मिलाने से किसी टीचर की नौकरी नहीं जाएगी लेकिन बड़ी संख्या में टीचर सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों में वैसे भी पढ़ाई का माहौल बहुत खराब है पिछले साल नीति आयोग की एक रिपोर्ट और शिक्षा मंत्रालय ने भी बताया था कि देश भर में 10 लाख से भी ज्यादा शिक्षक सरकारी स्कूलों में खाली पड़े हैं वही हजारे स्कूलों में टॉयलेट ना होने की बात सामने आई है। 27 फीसदी स्कूलों में टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है वहीं पिछले साल ही कैग की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि 27 फीसदी स्कूल ऐसे हैं जहां छात्र छात्राओं के लिए अलग से टॉयलेट नहीं है ऐसे में सरकारी स्कूलों में बच्चे कम जा रहे हैं और माता पिता तमाम जुगाड़ कर अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजने के लिए मजबूर हो रहे हैं।