सोनिया-राहुल ने सिंधिया को किया जलील, बीजेपी में सबको मिलता है सम्मान – नवीन कुमार

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जुझारू पत्रकार से देश की सबसे सशक्त पार्टी के प्रवक्ता बनने तक का सफर तय करने वाले नवीन कुमार एक आज किसी पहचान के मोहताज नही हैं। इन्होने पत्रकारिता जगत में युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर न सिर्फ उसे नई दिशा प्रदान की है बल्कि देश में पहली बार ऐतिहासिक और सबसे बड़े जनादेश का प्रतिनिधित्व करने वाली भारतीय जनता पार्टी का प्रवक्ता होने का गौरव भी पाया है। नवीन जी देश के कई प्रतिष्ठित न्यूज चैनल में चैनल हेड के तौर पर अपनी सेवाएं भी दे चुके हैं। वर्तमान राजनीति में बड़े फेर-बदल हुए हैं, कांग्रेस लगातार बीजेपी पर जोड़-तोड़ की राजनीति करने का आरोप लगा रही है। पार्टी के कई बड़े नेता कांग्रेस छोड़ बीजेपी में अपनी जगह बना चुके हैं। रीता बहुगुणा जोशी, जगदंबिका पाल, सतपाल महाराज जैसे कांग्रेस नेता आज बीजेपी में हैं, अब मध्य प्रदेश की राजनीति मे सक्रिय रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम चुके हैं। ऐसे में राजनीति पूरी तरह से गर्मा चुकी है। बीजेपी पर लग रहे तमाम आरोपों को लेकर पार्टी के कर्मठ और बेबाक प्रवक्ता के रूप में अपनी पहचान बना चुके नवीन कुमार से खास बातचीत की करंट रिव्यू की प्रिंसिपल कॉरस्पोंडेंट कोमल सुल्तानिया ने। 

करेंट रिव्यू – नवीन जी कांग्रेस के आरोप और ज्योतिरादित्य सिंधिया का 18 साल का साथ रहने के बाद भी कांग्रेस पार्टी छोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लेना क्या कांग्रेस के आरोपों को बल नहीं दे रहा? क्या पहले से प्लान था कि सिंधिया भारतीय जनता पार्टी जॉइन करने वाले है? 

नवीन कुमार – पिछले कुछ समय से कांग्रेस में खिचड़ी पक रही थी ना कि भारतीय जनता पार्टी में, जब कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़ा था तब मुख्यमंत्री का चेहरा ज्योतिरादित्य सिंधिया थे। ज्योतिरादित्य के चेहरे पर ठीक उसी तरह चुनाव लड़ा गया जैसे कि राजस्थान में सचिन पायलेट का चेहरा रखकर विधानसभा चुनाव लड़ा गया था। राज्य की जनता को पता है, कि सिंधिया युवा हैं और एक आत्मविश्वास के साथ कुछ नया करना चाहते हैं। यही सोचते हुए मध्यप्रदेश की जनता ने वोट किया था जिस वजह से कांग्रेस की सीटें बढ़ गई थीं लेकिन जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव जीत लिया तब उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया को दरकिनार कर दिया। हटने के बाद सिंधिया जी को अपमानित होना पड़ा, ये भारतीय जनता पार्टी ही नहीं सभी जानते है। हांलाकि हमारा ये कहना उचित नहीं होगा, ये कांग्रेस पार्टी का अंदरूनी मामला है। कांग्रेस का कहना है कि सिंधिया जी तो गांधी परिवार के सदस्य माने जाते हैं, और यहां तो सोनिया गांधी जी ने तो उन्हें मिलने तक का वक़्त नहीं दिया। तो क्या ये अपमान नहीं है। उसके बाद भी उन्हें ना ही  प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया न ही उनसे कोई बात की गई। अगर कोई नेता पार्टी का जनाधार है और पार्टी के लिए खुद को समर्पित कर देता है, उसके, साथ ऐसा सुलूक कितना जायज़ है। कोई भी पार्टी उस नेता का तिरस्कार या अपमान करती है जो लंबे समय से पार्टी के लिए खुद को न्योछावर करता रहा हो, तो कोई भी नेता या कार्यकर्ता पार्टी छोड़ देगा, जैसा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया जी ने किया।

करेंट रिव्यू – नवीन जी आप कांग्रेस के जोड़-तोड़ के आरोपों को नकार रहे हैं। आप यह कहना चाहते हैं कि कांग्रेस की अपनी गलत नीतियों की वजह से पार्टी के बड़े नेता साथ छोड़ रहे हैं न कि बीजेपी की जोड़-तोड़ की राजनीति की वजह से?

नवीन कुमार-  सिंधिया कांग्रेस में अपमानित हुए इसलिए उन्होंने पार्टी को छोड़ा और रही बात भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की, तो भारतीय जनता पार्टी हर उस व्यक्ति का आदर सम्मान करती है, जिसकी स्वच्छ छवि हो, जो निष्कलंक हो और जो जनता के लिए निःस्वार्थ भाव से राजनीति को माध्यम बनाते हुए जनता की सेवा करे। कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को ऐसा कुछ नहीं दिया, जिसके वो सही मायने में हकदार थे।

करेंट रिव्यू – ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस में रहते 2 बार केन्द्रीय मंत्री का दर्जा मिला है यही नहीं वो 4 बार सांसद भी रह चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस में रहते उन्हे कुछ नहीं मिला का आरोप तो निराधार है। कांग्रेस का बीजेपी पर आरोप है कि बीजेपी ने सिंधिया को तोड़ने के लिए मोटी कीमत चुकाई है, कितना सही है आरोप?

नवीन कुमार – बीजेपी पर झूठे आरोप लगाना कांग्रेस की पुरानी आदत है। आज कांग्रेस की दुर्गति उसकी गलत नीतियों के कारण हुई है न कि बीजेपी के कारण। जोड़-तोड़ की राजनीति करना कांग्रेस के सिद्धांत में शामिल है न कि भारतीय जनता पार्टी के सिंद्धांतों में। अब सिद्धू जी के बारे में क्या बोलूं, उस वक्त क्या हुआ था? ऐसे बहुत से कांग्रेस नेता हैं जिनके बारे बोलना शुरू करूंगा तो शायद रूक नहीं पाऊं। कांग्रेस ने उस वक्त कुछ नहीं कहा जब महराम सिंधिया जनसंघ में थे। 1980 के बाद इमरजेंसी के वक्त कांग्रेस ने सभी बड़े घरानों पर प्रतिबंध लगाना शुरू किया था, यही नहीं उन्हे तंग करना शुरू कर दिया था। ऐसी स्थित में उन्हे कांग्रेस में शामिल होना पड़ा था, अभी और बोलूंगा तो कांग्रेस अपनी ही नीतियों में उलझ जाएगी। उसे अपने गिरेबान में झांक कर देखना चाहिए। रही बात ज्योतिरादित्या सिंधिया की तो सिंधिया की राजमाता जी ने तो शुरूआत से ही बीजेपी का दामन थाम रखा है, और एक बार नहीं कई बार जीत कर भी आयी है। उनकी बुआ भी बीजेपी से जुड़ी हैं। अब कोई इस बीच ये कहे कि वो जनसंघ से नहीं जुड़े थे पारिवारिक जुड़े थे, तो कहना गलत होगा। 

कांग्रेस ने अपने अंदर उन जनाधार नेताओ का तिरस्कार किया जो चाटुकार नहीं थे। अगर इस स्थिति में सचिन पायलेट भी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होते हैं तो इसका ठीकरा कांग्रेस फिर से बीजेपी पर ही फोड़ देगी।

करेंट रिव्यू – सचिन पायलट का नाम लेकर आपने फिर राजनीति गर्मा दी। क्या माना जाए कि सिंधिया के बाद अगला नंबर सचिन पायलट का है बीजेपी में शामिल होने का? 

नवीन कुमार – ये हम नहीं बता सकते है, ये तो कांग्रेस वाले ही बताएंगे। 

करंट रिव्यू – कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में शामिल होने का रिवार्ड क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा भेज कर दिया जाएगा?

नवीन कुमार– अगर किसी पार्टी में किसी भी नेता या कार्यकर्ता को सम्मान नहीं मिलेगा और राज्यसभा सांसद से प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा तो कोई कब तक पार्टी के साथ रहेगा। बीजेपी हर पार्टी के नेता या कार्यकर्ता का तहेदिल से स्वागत करती है, जो व्यक्ति जिस भी काबिल है उसे उसका अधिकार जरूर दिया जाएगा। अगर राज्यसभा सांसद पद की गरिमा है तो सिंधिया को राज्यसभा सांसद जरूर बनाया जाएगा। फिलहाल ये पार्टी का अंदरूनी मामला है। 

करंट रिव्यू – कांग्रेस में रहते मंत्री पद पाने और राहुल गांधी के साथ हर पल साये की तरह साथ रखने के बावजूद भी आपको क्यों लग रहा है कि ज्योतिरादित्य के साथ सही व्यवहार नहीं किया गया?

नवीन कुमार – आप खुद अंदाजा लगाइये और पूरा घटनाक्रम देखिए। जबतक सिंधिया जी उपयोगी थे तबतक कांग्रेस ने उनका अच्छे से इस्तेमाल किया। बाद में उनसे किनारा कर लिया और उनकी कोई बात सुनी तक नहीं गई। यही नहीं लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस में रहते उनके साथ सही व्यवहार तक नहीं किया गया। अब जब सिंधिया ने बीजेपी का दामन थाम लिया है तो कांग्रेस को इतनी मिर्ची क्यों लग रही है। जबतक सिंधिया कांग्रेस में थे सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने उनसे मिलना तक ठीक नहीं समझा, अब जब वो बीजेपी में शामिल हो चुके हैं तो कांग्रेस को इतनी मिर्ची क्यों लग रही है और अब उन्हे मिलने के लिए वक्त क्यों दिया जा रहा है। 

करंट रिव्यू – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव हारने के बाद सिंधिया जी को भी पद नहीं दिया गया था, क्या भारतीय जनता पार्टी ने तभी समझ लिया था कि सिंधिया कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो सकते हैं?

नवीन कुमार – देखिए कोमल जी, हम कोई ज्योतष नहीं हैं जो हमें पहले से अनुभव होगा इस बात का। ये कांग्रेस का अंदरूनी मामला था इसमें हम क्या कर सकते हैं।

करंट रिव्यू – आपने बोला कि उन्हे सम्मान नहीं दिया जा रहा है इसलिए कांग्रेस छोड़ी तो ऐसे मेंकहीं न कहीं तो भाजपा को अंदरूनी बात पता होगी। 

नवीन कुमार – मैने नहीं कहा, आपने सवाल पूछा इसलिए मैने उसका जवाब दिया आपको। खिचड़ी बीजेपी नहीं कांग्रेस पका रही थी। तभी तो ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे युवा नेता को कांग्रेस में अपना भविष्य उज्ज्वल नहीं दिखा और उन्होने बीजेपी का दामन थाम लिया। 

करंट रिव्यू – नवीन जी इस्तीफे में जो तारीख थी वो 9 मार्च 2020 की थी परन्तु सिंधिया ने इस्तीफा 10 मार्च 2020 को अनाउंस किया, इसके पीछे क्या वजह रही?

नवीन कुमार – ये तो हर व्यक्ति की अपनी-अपनी सोच होती है। माधवराव सिंधिया की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में उन्होने कांग्रेस छोड़ी, ये तो बहुत बड़ी बात है। कोई भी व्यक्ति अपने जीवन के 18 वर्ष किसी पार्टी को देता है, वो भी उस वक्त जब वो युवा हो, उसमें आगे बढ़ने की उमंग हो ये एक बहुत बड़ी बात है लेकिन पार्टी के साथ इतने वर्ष देने के बाद भी अगर किसी युवा नेता को पार्टी छोड़नी पड़ जाती है तो कोई विशेष बात जरूर होगी। अब क्या अंदरूनी बात रही ये तो कांग्रेस ही बता सकती है। सिंधिया सोनिया, राहुल और प्रियंका तीनों के समान रूप से करीबी हैं। 

करंट रिव्यू – क्या ये कहना उचित नहीं होगा कि बीजेपी सही मौके का इंतजार कर रही थी और ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस के बीच इसी अंदरूनी मसले का फायदा उठाकर होली के त्यौहार पर ही बीजेपी ने रंग में भंग डालने का काम कर दिया।?

नवीन कुमार – मैं स्पष्ट रूप से आपको बोल रहा हूं कि बीजेपी अपने साथ कोई ज्योतिष लेकर नहीं घूमती है। बीजेपी अपने साथ कार्यकर्ता लेकर चलती है। आपको अगर भविष्य में ज्योतिष की चलते कोई जानकारी हासिल होती है तो आप हमें अवगत जरूर करवा दें। 

करेंट रिव्यू – अब 11 मार्च को जब सिंधिया जी का राष्ट्रीय अध्यक्ष जीपी नड्डा जी के सामने बीजेपी में आगमन हो ही गया है तो ऐसे में बीजेपी में उनका क्या भविष्य है?

नवीन कुमार – जी बिल्कुल, सिंधिया  जी का पार्टी में आगमन हो गया है। अभी उन्हे पार्टी की वरिष्ठ सदस्यता मिली है और आने वाले कुछ दिनों में भाजपा के सांसद भी होंगे। 

करंट रिव्यू – सिंधिया जैसे युवा नेता के पार्टी में आने के बाद बीजेपी खेमे में क्या महसूस किया जा रहा है?

नवीन कुमार – बीजेपी अपने आप को चौड़ा महसूस कर रही है। बीजेपी की ताकत बढ़ रही है और जनादार भी। जब भी कोई युवा व्यक्ति पार्टी में आता है तो जाहिर सी बात है हमारी ताकत और हौसले दोनों बुलंद होना लाज़मी है। स्वच्छ छवि से राजनीति के माध्यम से जनता की सेवा का मौका मिलता है, ऐसे में कोई ऐसी साफ छवि वाला नेता पार्टी में आता है तो इससे अच्छी बात भला क्या होगी। बीजेपी ने सिंधिया जी का 56 इंच के हृदय से स्वागत किया है। बीजेपी में बहुत ज्यादा खुशी और उत्साह का माहौल है। इसी के साथ मध्य प्रदेश में भी उत्साह जागा है। भारतीय जनता पार्टी ने एक बहुत बड़ा युवा नेता पार्टी में जोड़ा है जो अब भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के साथ चलेगा। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा पिछले 6 सालों में जो भी विकास कार्य हुए हैं, उसको विचारधारा समझते हुए, सिंधिया जैसे युवा नेता ने बीजेपी को चुना है। देश में वैसे तो बहुत दल बदल हैं लेकिन उन्होने बीजेपी को ही चुना क्योंकि देश की सेवा करने वाला सबसे सच्चा दल बीजेपी का ही है। मोदी जी की नीतियां  देश-विदेश में सराही जा रही हैं। भारत आज बहुत ही मजबूत स्थिति में है और अब देश के हर नागरिक को मजबूत करने का काम किया जा रहा है। अब आप खुद ही सोचिए कि इससे ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है?

करेंट रिव्यू – ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे युवा नेता के कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल होने से बीजेपी को क्या फायदा होगा? आखिर क्या सोच कर उन्हे पार्टी में शामिल किया गया?

नवीन कुमार – पार्टी को उनसे बस इतनी ही उम्मीद है कि वो देश को सही दिशा में आगे बढ़ाएं, बीजेपी को परिवार के तौर पर समझें और इस परिवार को और आगे बढ़ाएं, जन कल्याण में अपना अहम योगदान दें। मोदी जी चाहते हैं कि उनकी योजनाएं जन-जन तक पहुंचे ताकि उनकी नीतियों का फायदा जनता को मिल सके। किसानों, मजदूरों और मासूमों को योजना का पता चल सके और उसका सही लाभ उन्हे मिल सके।बीजेपी ने सिंधिया की काबिलियत को देखते हुए उन्हे पार्टी में शामिल किया है, ऐसे ही जन कल्याण के कई कार्य हैं जिनमें सिंधिया जी का अहर योगदान होगा। 

करेंट रिव्यू – सियासी रण में बीजेपी ने कांग्रेस से उसका एक बड़ा मोहरा छीन लिया, अगर मध्य प्रदेश में बीजेपी को सरकार बनाने का मौका मिलता है तो मुख्यमंत्री पद का चेहरा कौन होगा?

नवीन कुमार – ये एक बड़ा सवाल है और मुझे लगता है कि ये तो राष्ट्रीय दल ही तय करेगा लेकिन जहां तक मेरे अनुभव की बात है तो मुख्यमंत्री का चेहरा एकदम साफ है। शिवराज सिंह चौहान जी को ही मुख्यमंत्री बनना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि शिवराज चौहान ने मध्य प्रदेश में बहुत ही अच्छा काम किया है। इतने वर्षों के शासन के  बाद भी उनकी छवि बहुत ही शानदार है। वो मध्य प्रदेश के लोगों के दिल में बसे हैं। किसी के लिए वो मामा जी हैं, तो किसी के लिए चाचा जी। किसी के लिए भईया हैं तो किसी के लिए बेटा बनकर सेवा करते हैं। जनता से उन्हे इतना स्नेह मिला है कि हर कोई उन्हे मामा के तौर पर जानता है। शिवराज चौहान ने अपने कार्यकाल में मध्य प्रदेश के लिए बहुत बड़े काम किये हैं। हालांकि जो भी तय होगा वो मध्य प्रदेश में पार्टी के विधानमंडल की बैठक में तय किया जाएगा। 

करेंट रिव्यू – भारतीय जनता पार्टी को कितनी उम्मीद है कि मध्य प्रदेश में एक बार फिर उसका शासन होगा? अगर फिर सत्ता में आते हैं तो सबसे पहला काम क्या होगा?

नवीन कुमार – भारतीय जनता पार्टी पूरी तरीके से आश्वस्त है कि कुछ ही दिनों में मध्य प्रदेश में एक बार फिर बीजेपी का शासन होगा। पार्टी सबसे पहले जन कल्याण को लेकर बीजेपी के कार्यकाल में शुरू किये गए और कांग्रेस के शासन काल में रोके गए कामों को पुन चालू करेगी। जल्द ही अधूरे पड़े काम पूरे होंगे। जनकल्याण के नाम पर जिस प्रकार से कमलनाथ सरकार के डिप्टी सेक्रेटरी के पास से दिल्ली के तुगलक रोड से 100-100 करोड़ रूपया मिलता है, ऐसी लूट और डकैती का काम बंद होगा। जो भी जन कल्याण की योजनाएं हैं वो जन-जन तक पहुंचेंगी। 

करेंट रिव्यू- आपको ऐसा नहीं लगता कि बीजेपी कांग्रेस विधायकों को लेकर ओवर कॉन्फिडेंट है। जो भी विधायक इस्तीफा दे चुके हैं या देने वाले हैं, वो अगर इस्तीफा नहीं देकर कांग्रेस में वापस चले जाते हैं, तो बीजेपी कैसे मध्य प्रदेश में सरकार बना पाएगी?

नवीन कुमार – भारतीय जनता पार्टी अगर-मगर में विश्वास नहीं करती। रही बात इस्तीफे की तो कुछ दिन लोगों को इंतजार कर लेना चाहिए, परिणाम खुद-ब-खुद सामने आ जाएंगे। अगर मगर में जाएंगे तो कुछ हासिल नहीं होगा। 

करेंट रिव्यू – क्या ये माना जाए कि मध्य प्रदेश की तरह ही बीजेपी महाराष्ट्र और झारखण्ड में कांग्रेस को झटका दे सकती है?

नवीन कुमार – ये तो भविष्य ही बताएगा। वैसे देखा जाए तो भगदड़ तो कांग्रेस में मची है ना कि बीजेपी में। हमने मध्य प्रदेश में कोई जोड़-तोड़ की राजनीति नहीं की बल्कि जा कर शांति से बैठ गए थे। ऐसा भी नहीं है कि मध्य प्रदेश में हमारा संख्याबल कम था। अगर वहां बीजेपी जोड़-तोड़ की कोशिश करती तो निश्चित ही सरकार बीजेपी की ही बनती। रही बात महाराष्ट्र की तो वहां तो हमारी पार्टी बहुमत के साथ आई थी। हमारे सहयोगी दल ने हमारा साथ छोड़ा था ना कि हमारी पार्टी ने। महाराष्ट्र की जनता की पीठ में सहयोगी दल ने छुरा मारने का काम किया है। हालांकि शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की आपस में नहीं बनती लेकिन स्वार्थवश एक हो गए लेकिन जनता को फायदा क्या हुआ। बीजेपी द्वारा शुरू किए गए सभी विकास कार्य रूक गए। आपसी खींचतान में तीनों पार्टियों का गठबंधन अपनी डफली अपना राग वाली कहावत सही साबित कर रहे हैं। अलग-अलग विचारधाराओं के चलते उनका आपस में टकराव जारी है। महाराष्ट्र की सरकार वेंटिलेटर पर है। जितने दिन चल रही चलेगी, अब इसका दोष बीजेपी को तो नहीं दिया जाना चाहिए। 

करेंट रिव्यू – भविष्य में जनता को भारतीय जनता पार्टी से क्या उम्मीदें रखनी चाहिए?

नवीन कुमार – बीजेपी स्वच्छ शासन देगी, अच्छी सरकारें देगी। जहां भी बीजेपी की सरकार नहीं है वहां एक अच्छे विपक्ष की भूमिका निभाएगी। 

करेंट रिव्यू – नवीन जी, आपने इस्लामिक मदरसे बेनकाब पुस्तक लिखी है। क्या मकसद है इस पुस्तक को लिखने का कुछ इस बारे में भी बताइये?

नवीन कुमार – जी बिल्क्ल, मैनें इस्लामिक मदरसे बेनकाब किताब लिखी है और ज्यादातर लोग इस पुस्तक के बारे में जानते भी हैं। 2008 में मैने इस पुस्तक को लिखा था। किताब को परमपूज्य संचालक सुदर्शन जी ने कॉरपोरेट किया था। मेरी ये किताब फैक्ट्स के आधार पर है कि किस तरह से सीमावर्ती इलाकों में एक विशेष वर्ग के लोगों को आतंकी ट्रेनिंग दी जा रही है और कैसे मदरसे होमोसैक्सुअलिटी का एक बहुत बड़ा अड्डा बन चुके हैं। 

करेंट रिव्यू – आपकी ये पुस्तक कहां-कहां उपलब्ध है?

नवीन कुमार – मेरी ये किताब देश और राजधानी के हर स्टोर पर मौजूद है। जिसे नहीं मिलती वो मुझे मेरे ट्वीटर हैंडल पर संपर्क कर किताब हासिल कर सकता है। मेरा ट्वीटर हैंडल है naveenjindalbjp. अगर कोई व्यक्ति संपर्क करता है तो मैं उस तक किताब पहुंचा दूंगा। 

करेंट रिव्यू – आप भारतीय जनता पार्टी में प्रवक्ता के तौर पर जुड़े हैं, ऐसे में आपको पार्टी ने क्या-क्या जिम्मेदारियां सौंप रखी हैं?

नवीन कुमार – मैं ना ही पार्टी का मस्तिष्क हूं और ना ही चेहरा। मस्तिष्क पार्लियामेंट के साथ जुड़ा हुआ है। बीजेपी का मुख्य चेहरा नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा जी हैं। मैं पार्टी का मुख जरूर हूं। पार्टी का मुख होने के नाते पार्टी की बातों को जन-जन तक पहुंचाना मेरी जिम्मेदारी है और पार्टी की इस जिम्मेदारी को मैं बखूबी निभाने की कोशिश करता हूं। 

करेंट रिव्यू – नवीन जी, आप एक वरिष्ठ पत्रकार भी रहे। क्राइम के स्पेशलाइजेशन भी रहे और जीन्यूज, राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण जैसे तमाम बड़े संस्थान से जुड़ कर काम करने के बाद आप बीजेपी के प्रवक्ता भी हैं। राजनीति के क्षेत्र में आप खुद को किस मुकाम पर देखना पसंद करते हैं?

नवीन कुमार – जी, आपने बहुत से पत्रकारों को किसी पार्टी का एजेंडा चलाते या चाटुकारिता करते देखा होगा। मैने कभी इस तरह का टैग अपने साथ नहीं जोड़ा। मैं जो भी हूं सबके सामने हूं। मैं राजनीति और पत्रकारिता दोनों की गरिमा को बनाए हुए हूं। मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से राजनीति या पत्रकारिता धूमिल हो। यही वजह है मैं सही बात जनता तक पहुचाता हूं। मैं शुद्ध रूप से बीजेपी की विचारधारा से जुड़ा हूं जिसे स्वीकार करते हुए मैं वर्तमान में पार्टी प्रवक्ता बना हुआ हूं। मेरे ऊपर फिलहाल पार्टी प्रवक्ता केरूप में एक जिम्मेदारी है जिसे मैं बखूबी निभा रहा हूं, इस वक्त मैं पत्रकार नहीं हूं। पार्टी प्रवक्ता होने के नाते मैं हर दायित्व को निभा रहा हूं। 

करेंट रिव्यू – नवीन  जी, पत्रकारिता छोड़ राजनीति में आने का कोई तो स्वार्थ होगा। कुछ तो उम्मीदें होगीं  आपको बीजेपी से?

नवीन कुमार – अटल बिहारी वाजपेई जी, लालकृष्ण आडवाणी जी और मदन लाल खुराना जी भी पत्रकार थे। विजय कुमार जी एक प्रोफेसर थे। बीजेपी में बहुत से ऐसे चेहरे हैं जो अलग-अलग क्षेत्रों से निकल कर पार्टी में शामिल हुए। व्यक्ति अगर किसी चीज से जुड़ता है तो वो एक सेटिसफेक्शन चाहता है। अब ये सेटिसफेक्शन चाहे राष्ट्रवाद से जुड़ा हो या राष्ट्रहित से। अवसर मिलने पर देश की सेवा करने पर सुकून मिलता है। भारत मां को ऊंचाई पर ले जाना है तो कहीं न कहीं सब को साथ में आना ही पड़ेगा। 

करेंट रिव्यू – नवीन जी, क्या भविष्य में आपको मंत्री पद पर देखा जा सकता है, या पार्टी की कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है?

नवीन कुमार – देखिए भविष्य की बात तो मैं कर नहीं सकता। सादा जीवन  सादगी से ही आता है। पीएम मोदी जी को ही देखिए उनकी सादगी और कर्मठता की दुनिया दीवानी है। निश्चित तौर पर जीवन का कोई लक्ष्य होना चाहिए और लक्ष्य को पाने के लिए श्री नरेन्द्र मोदी जी लगातार हमें प्रेरित करते हैं। मुझे लगता है फिलहाल हम सही दिशा में काम कर रहे हैं और अच्छा कर रहे हैं। संगठन का विश्वास हम पर यूं ही बना रहना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी ही हमर भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहकर एक सशक्त विचारधारा के साथ काम कर सकें। 

करेंट रिव्यू – नवीन जी आपने हर सवाल का बेबाकी और चतुराई से जवाब दिया। करेंट रिव्यू को अपना कीमती वक्त देने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

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