कोविड-19 में देवदूत बने बिहार के वॉरियर डीजीपी!

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आज हम एक ऐसे शख्स से मुलाकात करवाने जा रहे हैं जो पूरे बिहार में अपने काम को लेकर एक अलग पहचान बना चुके हैं। इन्होंने कोविड-19 जैसी गंभीर महामारी में लोगों को जागरूक करने से लेकर लोगों की हर संभव मदद करके अपनी जिम्मेदारी को निभाया। सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक इनके काम की खूब सराहना की गई। हम बात कर रहे हैं बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की। करंट रिव्यू की प्रिंसिपल करेसपॉंडेन्ट कोमल सुल्तानिया ने गुप्तेश्वर पांडेय से बिहार में सरकार और प्रशासन के द्वारा किये गए इंतजाम को जानने की कोशिश की।

करेंट रिव्यू – गुप्तेश्वर जी आपका करंट में स्वागत है। सबसे पहले कोविड-19 जैसी गंभीर बीमारी में आपके द्वारा किये गए बेहतर कार्य के लिए आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं। सर पांचवा चरण अनलॉक-1 शुरू हो चुका है। ऐसे में बिहार इसके लिए कितना तैयार है?

गुप्तेश्वर पांडेय – इस बात को जनता को समझने की जरूरत है। हम लॉकडाउन के इस पांचवे चरण को जेंटल लॉकडाउन कह सकते हैं। इस जेंटल लॉकडाउन में जनता की भूमिका बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसके लिए हम जनता को जागरूक करने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। ये एक ऐसा वायरस है जो जाति या धर्म नहीं देखता। जनता कर्फ्यू से लेकर लॉकडाउन के इस पांचवे चरण तक पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक वॉरियर के तौर पर काम किया है और आगे भी करती रहेगी। विभिन्न माध्यमों के जरिए हमने बिहार की जनता को जागरूक करने की कोशिश की है। बिहार के लोगों ने हमारा पूरा साथ दिया है और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सरकार और प्रशासन के द्वारा जारी की गई गाइडलांइस का पालन किया है। मास्क से लेकर सेनेटाइजर या एहतियात के तौर पर जो भी कदम उठाये जाने चाहिए उठाये जा रहे हैं। संकट की इस घड़ी में बिहार देश के साथ पूरी मुस्तैदी के साथ खड़ा है और सभी लोग एक दूसरे का साथ दे रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने भी कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए पूरी तरह से कमर कसी हुई है।

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करेंट रिव्यू – केन्द्र ने राज्य सरकारों को जिम्मेदारी सौंप दी, राज्य ने जिला प्रशासन को, ऐसे में मुखिया होने के नाते आपके ऊपर दोहरी जिम्मेदारी आ गई है, सुरक्षा और सरंक्षा दोनों ही आपके हाथ में है। ऐसे में जिला प्रशासन को लेकर आपके सुझाव क्या हैं?

गुप्तेशवर पांडेय – पुलिस तो हमेशा से फ्रंट लाइन पर ही काम करती है। अब देश में कोरोना का संकट आया है तब भी फ्रंट पर काम कर रही है। किसी व्यक्ति को मेडिकल सुविधा पहुंचाने की बात हो या फिर लॉकडाउन के नियमों का पालन करवाने की बात हो हर कार्य में पुलिस की भूमिका कोर फ्रंट पर ही होती है। एक सिपाही से लेकर एक थानेदार को उनकी ड्यूटी बताना साथ ही एक-एक जिला प्रशासन को जिम्मेदारी समझाना। जब सरकार द्वारा कोई भी गाइडलाइन दी जाती है, मैं खुद सभी से मीटिंग करते हुए उन्हें उनकी जिम्मेदारी समझाता हूं। मैं खुद सभी कोर फ्रंट अधिकारी के साथ कंटेंटमेंट जोन और रेड जोन में भी जा कर उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ा हो कर जमीनी कार्य करता हूं। उनका मनोबल बढ़ाता हूं। इस आपदा से निपटने के लिए कैसे हमें खुद को सुरक्षित रखते हुए जमीनी कार्य करना है। कैसे कार्यों को इंप्लीमेंट करना है, ये सारी बातें समझाता हूं और सभी को जागरूक करता हूं।

मैं खुद एक-एक सिपाही, थानेदार, एसपी, हो या जिला अधिकारी सभी से बात करता हूं उन्हें उनकी फर्ज याद दिलाता हूं उनकी उनके उनकी ड्यूटी बताता हूं कि हमें हमारी कोई सुरक्षा नहीं है हमें हर कार्य को बखूबी निभाना है क्योंकि हम देश के लिए जीते हैं देश के लिए लिए मर मिटते हैं।

करेंट रिव्यू – बिहार में कितने कंटेंटमेंट जोन है?

गुप्तेशवर पांडेय – बिहार में कंटेंटमेंट जोन की संख्या बहुत लंबी है लेकिन समय और परिस्थिति के अनुसार कंटेंटमेंट जोन बदलता रहता हैं साथ ही जब कंटेंटमेंट कोरोना से मुक्त हो जाता है तो उस क्षेत्र को कंटेटमेंट जोन से मुक्त कर दिया जाता है।
इसी के साथ यह भी बताना चाहूंगा कि समय से अनुसार रेड जोन को भी बदला जाता है। और बिहार में किसी भी जिले को ग्रीन जोन में नहीं रखा गया था। बिहार में सिर्फ रेड और ऑरेंज जोन ही रखा गया था।
लॉकडाउन में सरकार द्वारा जो भी आवश्यक गतिविधियों की गाइडलाइंस दी गई थीं उनका पालन करवाया गया, हमने भी उन सभी आवश्यक गतिविधियों को जारी रखा। सभी जोन में लॉकडाउन के नियमों का सख्ती से पालन करवाया गया।

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करेंट रिव्यू – कोविड-19 जैसी विश्वव्यापी बीमारी के वक़्त प्रवासी मजदूरों के साथ कई दुखद घटनाएं भी हुईं, इसको लेकर आपका क्या संदर्भ है?

गुप्तेशवर पांडेय – सबसे पहले तो किसी को भी इन्हें प्रवासी मजदूर कहने का कोई हक नहीं है। पूरा देश एक है और श्रम ही श्रमिकों का है। हमारे देश वासियों के चेहरे पर जो मुस्कान, चमक है, वह श्रमिकों के पसीना है। हम जिन सुखों और सुविधाओं पर खुश होते हैं वह हमारे देश के श्रमिकों की ही देन है। देश के विकास की जब हम बात करते हैं तो वो विकास हमारे श्रमिकों की मेहनत का परिणाम होता है। हमारे श्रमिकों ने इस देश के लिए जी-तोड़ मेहनत की है, पसीना बहाया है।

श्रमिक इस देश की जड़ हैं जिसके बिना यह देश अधूरा है। हमारा ही क्यों विश्व का कोई भी देश अधूरा है। यदि श्रमिक ही नहीं रहेंगे तो पूरे देश में विकास की गति मंद पड़ जाएगी और आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ जाएंगी। श्रमिक हमारे देश की शान हैं।

देश में अचानक लॉकडाउन लागू हुआ, जिसकी वजह से जो जहां था वहीं फंस गया। हमारे बिहारवासी देश के हर एक कोने में फैले हुए हैं। यातायात की कोई सुविधा नहीं होने की वजह से बिहार प्रशासन चाहते हुए भी उन्हें वापस नहीं बुला पा रहा था हालांकि लॉकडाउन 3 में केंद्र सरकार ने सभी श्रमिकों के लिए श्रमिक ट्रेनें चलाईं और श्रमिकों को वापस बुलाने का निर्णय लिया। जब श्रमिक मजदूरों की वापसी के लिए यातायात शुरू हुआ तो हमने भी उनके स्वागत की भव्य तैयारियां शुरू कर दी। बहुत मुश्किलों का सामना करते हुए हमारे श्रमिक मजदूर विभिन्न माध्यमों ट्रेन, बस, पैदल, सीमा पार करते हुए अपने राज्य पहुंचे। पूरे देश में सिर्फ बिहार में ऐसी व्यवस्थाएं की गईं।

क्वारंटाइन सेंटर में किस तरह की व्यवस्थाएं की गई थीं…
कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए तीन स्तर पर क्वारांटाइन सेंटर बनाए गए। जैसे ही सीमा पर मजदूर पहुंच रहे थे, वहीं पर उनका खाना-पीना, रहना और ट्रांसपोर्टेशन की पूरी व्यवस्थाएं की गई थीं। उनको उनके संबंधित ब्लॉक में पहुंचाना, साथ ही उनकी देखभाल करना हमारी प्राथमिकता थी। क्वारांटाइन सेंटर में उनकी दवा, दूध, भोजन, साबुन, सफाई, हाइजीन या फिर किसी तरह की भी सुविधाएं हों, हर तरह की व्यवस्था की गई। हमारी बिहार सरकार की भी यहीं योजना थी कि मजदूरों को 14 दिनों का क्वारांटाइन करवाया जाए जिसके बाद वे अपने घरों के लिए प्रस्थान कर सके ताकि कोरो ना महामारी से बाकी बिहारवासियों को बचा सके।

मजदूरों की संख्या भी बढ़ने लगी तो उससे निपटने के लिए सभी पंचायत सेंटरों को भी क्वारांटाइन सेंटर बना दिया। उसके बाद भी संख्या बढ़ी तो स्कूल, कॉलेज आदि ग्राउंड लेवल पर क्वारांटाइन सेंटर बना दिया।

करेंट रिव्यू – बिहार प्रशासन कह रहा है कि प्रवासी मजदूरों को हर तरह की सुविधाएं दी गईं फिर क्वारंटाइन सेंटर्स में हंगामा क्यों हुआ। इसके पीछे क्या वजह रही?

गुप्तेशवर पांडेय – यह कहीं न कहीं अपवाद है। अगर कहीं किसी जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे लोकल प्रशाशन, लोकल जनप्रतिनिधि की वजह से कोई चूक हो गई होगी, कोई असुधिवा हो गई होगी तो इसके लिए मैं स्वयं सभी क्वॉरेंटाइन सेंटर में हुए भर्ती हुए लोगों से तहे दिल से क्षमा मांगता हूं लेकिन इस मुसीबत के वक़्त सभी ने सफलता पूर्वक अपनी जान को जोखिम में डालते हुए पूरा योगदान दिया। हालांकि 100 में 99% सेंटर पर बहुत अच्छी व्यवस्था रहीं और हम लोगों ने सफलतापूर्वक इस प्रयोग को किया। इस देश में पहला राज्य बिहार है जिसने सफतापूर्वक सभी प्रयोगों को पूरा किया। आप खुद ही कल्पना कर के देखिए, लाखों की संख्या में क्वॉरेंटाइन सेंटर बने और लाखों लोगों के लिए भोजन, रहना, दवा, आने-जाने का भाड़ा, दवा आदि की व्यवस्थाएं करना कितनी बड़ी जिम्मेदारी है, लेकिन फिर भी हम सभी ने एकजुट हो कर पूरी कोशिश और मेहनत की ताकि हमारे क्वारांटाइन हुए लोगों को किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हो।

करेंट रिव्यू – इस कोरोना संकट के बीच कई पुलिसकर्मी संक्रमित भी हुए, ऐसे में आप लोगों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने क्या व्यवस्था की है?

गुप्तेशवर पांडेय – कोरोना तो ऐसी वैश्विक महामारी है, जो किसी को नहीं पहचानती। इस महामारी में स्वास्थ्यकर्मी , पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी, मीडियाकर्मी आदि जो भी फ्रंट पर आकर काम कर रहे हैं, उन्हें वाकई खतरा है और कई फ्रंटकर्मी कोरोना की चपेट में भी आए हैं लेकिन सरकार ने काफी व्यवस्थाएं की हैं साथ ही हम लोग भी प्रिकॉशन्स ले रहे हैं।

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करेंट रिव्यू –इस कोरोना संकट के दौरान बिहार पुलिस मुखिया के तौर पर लॉकडाउन 1 से लेकर लॉकडाउन-4 तक किस तरह की चुनौतियों का आपको सामना करना पड़ा?

गुप्तेशवर पांडेय – यह सफर बहुत ही अनुभव भरा रहा। इस लॉकडाउन में चुनौतियां बहुत आयीं लेकिन इस बीच सबसे बड़ी चुनौती रही लोगों को शिक्षित करना। शिक्षित का मतलब यह है कि लोग समझ नहीं पा रहे थे की कोरोनावायरस है क्या, यह कितना ख़तरनाक है, यह लॉकडाउन क्या है? इसलिए हमारी सबसे पहली जिम्मेदारी थी लोगों को सही जानकारी हो कि कोरोनावायरस वाकई एक जानलेवा महामारी है जिसकी वजह से सम्पूर्ण देश में लॉकडाउन है। सरकार द्वारा अखबारों में विज्ञापन दे कर, जगह-जगह प्रचार करवा कर ऐसे कई व्यापक इंतजाम किए गए। मैं खुद सोशल मीडिया से लाइव कर के जनता के बीच आ कर उन्हें समझाता था, उनकी बातों को समझता था और सभी जनता को सोशल मीडिया के माध्यम से समझाते हुए उनके अंदर जागृति पैदा करने की कोशिश करता था। पहला लॉकडाउन जनता और प्रशासन दोनों के लिए ही नया था तो इस दौरान सभी का समय ट्रेनिंग करने में ही बीत गया। पहले लॉकडाउन में हमारी पुलिस टीम को बिहार की जनता को जागरूक करने और अपने कर्तव्य को समझने में लग गए। पहले लॉकडाउन में कुछ लोगों की नासमझी के कारण पुलिस और स्वास्थ्यकर्मियों के ऊपर हमला भी हुआ जिसको हम सभी ने मिलकर सामना किया। जिन लोगों ने पुलिस के ऊपर हमला किया, उनके ऊपर कार्यवाही भी हुई वहीं ऐसी घटनाएं आगे न हों इसके लिए लोगों को समझाया भी गया। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाना और लोगों में नफरत पैदा करने की एक लहर उठी थी हालांकि इस तरह की घटनाएं थम चुकी हैं। जैसे-जैसे जनता समझने लगी उसने अपना योगदान देना शुरू कर दिया जिसकी वजह से आज हम सभी इस कोरोना की लड़ाई को सफलतापूर्वक लड़ रहे हैं और मुझे आगे भी विश्वास है कि हमारी जनता हमारा पूरा साथ देगी जिसकी वजह से कोरोना की लड़ाई पर विजय प्राप्त कर लेंगे।

करेंट रिव्यू –इस कोरोना संकट की वजह से देश और बिहार में अपराध भी बढ़े हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस प्रशासन की क्या भूमिका होगी?

गुप्तेशवर पांडेय – लॉकडाउन खुलने के बाद अपराध में वृद्धि की संभावना हो सकती है। इसके लिए सभी पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की गई। सभी अधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत करता रहता हूं और हर पल की जानकारी लेता हूं साथ ही उचित निर्देश और परामर्श भी देता हूं। बिहार में कुल 40 जिले हैं जिसमें 38 रेवेन्यू जिले और 2 पुलिस तैनात जिले हैं। अपराध बढ़ने की संभावना है लेकिन पुलिस हर चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

करेंट रिव्यू –सर, इस वर्ष बिहार में विधानसभा चुनाव भी होने हैं और कोरोना भी है, इस दोहरी चुनौती से निपटने के लिए क्या करेंगे, कैसे समान्जस्य बैठाएंगे आप?

गुप्तेशवर पांडेय – जी, यह किसी के लिए भी बहुत बड़ी चुनौती है। जब भी किसी प्रदेश में चुनाव होता है जेनरल प्रशासन, जिला प्रशासन या कोई भी बड़ा अधिकारी हो, सभी के कंधो पर जिम्मेदारी और चुनौती बढ़ जाती है, हालांकि अब बिहार में चुनाव का समय आ गया है। इसलिए हम यह कह सकते हैं कि वाकई यह एक दोहरी चुनौती होने वाली है।

करेंट रिव्यू –कोरोना काल में मैट्रिक परीक्षा का परिणाम आया और आपने टॉपर बच्चों से बातचीत भी की और मिले भी, इस विषय पर क्या बोलेंगे?

गुप्तेशवर पांडेय – मैं हमेशा सोशल मीडिया के माध्यम से नौजवानों से संवाद करता रहता हूं साथ ही उनका हौसला बढ़ाने की कोशिश करता हूं। बिहाल के नटवर जिले से एक बच्चे ने मैट्रिक पास की है। उसके माता-पिता एक किसान हैं। खेती भी ज्यादा नहीं है लेकिन उन्होने अपने बच्चे को काफी मेहनत से पढ़ाया है जिसे देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। ऐसे बच्चों का मैं सदैव मनोबल ऊंचा करता हूं। जैसे ही मुझे जानकारी मिली मैंने तुरंत उस बच्चे को फोन किया, उसे बधाई दी। मैंने उससे कहा कि मुझसे जो बन पड़ेगा मैं तुम्हारी आगे की पढ़ाई के लिए कुछ करूंगा। मैं तुमसे मिलने तुम्हारे घर जरूर आऊंगा। ऐसा करने से बच्चों के अंदर पढ़ाई करने की इच्छा और जागरूकता बढ़ती है इसलिए मैं ऐसे बच्चों का मनबल बढ़ाता रहता हूं और इनसे बात करता रहता हूं।

करेंट रिव्यू –करेंट रिव्यू के दर्शकों और पाठकों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगे?

गुप्तेशवर पांडेय – मैं आपके करेंट रिव्यू में माध्यम से सभी देशवासियों के साथ ही पत्रकार, पुलिसकर्मियों और आम जनता सभी से कहना चाहूंगा कि आप लोगों के सहयोग के बिना कुछ भी संभव नहीं है। अपनी बुद्धि विवेक से अपराध को कम करें, किसी भी कार्य में सफलता मिलने के पीछे जनता का सबसे बड़ा योगदान होता है। पुलिसकर्मी को तभी सफलता मिलती है जब जनता का विश्वास और साथ मिलता है। दलित, गरीब, मजदूर ऐसे लोगों के हक के लिए उनके अधिकार के लिए सभी को खड़ा रहना चाहिए ताकि पुलिस के प्रति भरोसा हो ऐसा कोई भी काम नहीं करें जिससे पुलिस की छवि खराब हो। अगर आप अपना कर्तव्य अच्छे से निभाएंगे तो बेशक जनता का प्यार आपको मिलता रहेगा। हमारे देश के पत्रकार लोकसभा के चौथे स्तंभ हैं। खबर इस समाज का सकारात्मक पहलू है जिसे बहुत ही मजबूती के साथ रखना चाहिए। ये वक़्त जातिवाद भूलकर और एकजुट हो कर कोरोना को हराने का वक़्त है। देश एक जुट हो कर लड़ेगा तो कोरोना हारेगा, देश जीतेगा।

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