जानलेवा कोरोनावायरस भारत में सरदर्द बढ़ा रहा: एक दिन में 2000 से ज्यादा मौत का आंकड़ा सामने!

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चीन से ही शुरू हुआ कोरोना वायरस वैसे तो पूरी दुनिया में तबाही मचा रहा है, लेकिन पिछले कुछ दिनों के आंकड़े देखें तो यह भारत का सरदर्द कुछ अधिक ही बढ़ा रहा. देश में 66 दिन के लॉकडाउन के बाद जब पाबंदियों में ढील दी गई, कोरोना भी अनलॉक हो गया.

भारत में पिछले 24 घंटे में दो हजार से ज्यादा मौतें सिर्फ कोरोनावायरस से हुई हैं, जोकि हैरान करने वाला आंकड़ा है. वहीं, कोविड-19 से संक्रमित होने वाले कुल मरीजों की संख्या बुधवार को साढ़े तीन लाख के पार पहुंच गई.

बता दें कि महाराष्ट्र और दिल्ली ने पिछले 24 घंटे में पुराने आंकड़े को अपडेट किया है, यानी जो मौतें पहले हो गई थीं लेकिन दर्ज नहीं हुई थीं. जैसे दिल्ली में कल 93 मौतें हुईं, लेकिन रजिस्टर्ड 437 हुईं.

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में कोरोना वायरस से एक दिन में 2003 जानें गई हैं, जबकि 10,974 नए मामले सामने आए हैं। मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 3,54,065 हो गई. इसमें से 1,55,227 सक्रिय मरीज हैं और 1,86,935 लोग ठीक हो चुके हैं.

कोरोना महामारी ने सबसे ज्यादा महाराष्ट्र को प्रभावित किया है. राज्य में 1,13,445 कुल मामलों की संख्या पहुंच चुकी है, जबकि 50057 सक्रिय मरीज हैं. इसके अलावा 57851 लोग ठीक हो चुके हैं और 5537 लोगों की जान गई है.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना मरीजों का कुल आंकड़ा 44,688 हो चुका है, जिसमें 26351 एक्टिव मरीज हैं. इसके अलावा 16,500 मरीज ठीक हो चुके हैं और 1837 लोगों की जान गई है.

तमिलनाडु में भी कोरोना ने काफी कहर बरपाया है. राज्य में मरीजों की कुल संख्या 48019 पहुंच चुकी है. इसमें से 20709 सक्रिय मरीज हैं, जबकि 26782 लोग ठीक हो चुके हैं. राज्य में 528 लोगों की जान गई है.

उत्तर प्रदेश में कोविड-19 से संक्रमित हुए मरीजों की संख्या 14091 हो गई है, जिसमें 5064 सक्रिय और 8610 ठीक हो चुके मरीज शामिल हैं। राज्य में अभी तक 417 लोगों ने जान गंवाई है.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के चार में से तीन महानगर कोरोना के बड़े हॉटस्पॉट के तौर पर उभरे हैं. इनमें आर्थिक राजधानी मुंबई और चेन्नई भी शामिल हैं. देश में कोरोना के मरीजों की तादाद 3.5 लाख के करीब पहुंच गई है, तो मृतकों की संख्या भी लगभग 10000. कोरोना की रफ्तार पर लगाम लगाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा.

अर्थव्यवस्था एक तो पहले से ही सुस्ती का सामना कर रही थी, रही-सही कसर कोरोना की महामारी ने पूरी कर दी. कोरोना के कारण लागू हुए लॉकडाउन के कारण देश की रफ्तार थम गई, तो उद्योग और व्यापार भी. फैक्ट्रियों से मशीनों का शोर गायब रहा तो तो सुस्ती से उबरने की कोशिशों में जुटी अर्थव्यवस्था के प्रयास भी शिथिल पड़ गए.

रोजगार छिन जाने से रोटी का संकट उत्पन्न होने पर प्रवासी मजदूर अपनी मिट्टी की तरफ खींचे चले गए, तो बेरोजगारी की दर भी कई साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. कहीं सरकार ने इकोनॉमी को संकट से उबारने के लिए 20 लाख करोड़ का पैकेज घोषित करने के साथ ही ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की शुरुआत जरूर की है, लेकिन नेगेटिव ग्रोथ रेट के अनुमानों के बीच अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना भी आसान नहीं नजर आ रहा.

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