चीन की धमकियों और दवाब के सामने नहीं झुकेंगे ना ही कोई समझौता करेंगे: डॉ. मनमोहन सिंह!

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भारत और चीन की सेना के बीच गालवान घाटी में हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिकों की शहादत पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि हम चीन की धमकियों और दबाव के सामने नहीं झुकेंगे और न ही अपनी अखंडता से कोई समझौता स्वीकार करेंगे।

उन्होंने कहा कि 15-16 जून को गलवान घाटी लद्दाख में भारत के वीर साहसी जवानों ने सर्वोच्च कुर्बानी दी। देश के वीरों ने साहस के साथ अपना कर्तव्य निभाते हुए देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। देश के इन सपूतों ने अपनी अंतिम सांस तक मातृभूमि की रक्षा की। इस सर्वोच्च त्याग के लिए हम इन साहसी सैनिकों व उनके परिवारों के कृतज्ञ हैं। उनका यह बलिदान खाली नहीं जाने देंगे।

उन्होने कहा कि आज इतिहास एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। हमारी सरकार के निर्णय व सरकार द्वारा उठाए गए कदम तय करेंगे कि भविष्य की पीढ़ियां हमारा आंकलन कैसे करें। जो देश का नेतृत्व कर रहे हैं, उनके कंधों पर कर्तव्य का गहन दायित्व है। हमारे प्रजातंत्र में यह दायित्व देश के प्रधानमंत्री का है। प्रधानमंत्री को अपने शब्दों व ऐलानों द्वारा देश की सुरक्षा एवं सामरिक व भूभागीय हितों पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति सदैव बेहद सावधान होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज तक भारतीय सीमा में गलवान घाटी एवं पांगोंग त्सो लेक में अनेकों बार जबरन घुसपैठ की है। लेकिन हम उनकी धमकियों व दबाव के सामने नहीं झुकेंगे और न ही अपनी भूभागीय अखंडता से कोई समझौता करेंगे। लेकिन देश के प्रधानमंत्री को अपने बयान से उनके षडयंत्रकारी रुख को बल नहीं देना चाहिए तथा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकार के सभी अंग इस खतरे का सामना करने व स्थिति को और ज्यादा गंभीर होने से रोकने के लिए परस्पर सहमति से काम करें और यह समय पूरे राष्ट्र को एकजुट होने का है और दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने का है।

उन्होंने कहा कि हम सरकार को आगाह करेंगे कि भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीति तथा मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं हो सकता। पिछलग्गू सहयोगियों द्वारा प्रचारित झूठ के आडंबर से सच्चाई को नहीं दबाया जा सकता।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि वक्त की चुनौतियों का सामना करें, और कर्नल बी. संतोष बाबू व हमारे सैनिकों की कुर्बानी की कसौटी पर खरा उतरें, जिन्होंने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ व ‘भूभागीय अखंडता’ के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। इससे जनादेश से ऐतिहासिक विश्वासघात होगा।

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