Amazon के सीईओ पद छोड़ने वाले फाउंडर जेफ बेजोस ने एमेजन को कैसे बनाया लोकप्रिय, सामान टूटने के बाद भी मिल जाता है पैसा वापस

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Amazon के फाउंडर जेफ बेजोस ने सीईओ पद छोड़ने की घोषणा कर दी है. उनकी जगह अब Andy Jassy कंपनी के नए सीईओ होंगे. लेकिन जेफ बेजोस amazon को दूसरी तरीके से संभालेंगे। वे कंपनी के एक्जीक्यूटिव बोर्ड के एक्जीक्यूटिव चेयर मैन का पद संभालेंगे।

Amazon आखिर क्यों दुनिया भर में लोगों को इतना पसंद है। इसका सीधा जवाब यह है कि कंपनी ग्राहकों को कई तरह के ऑप्शन देती है। वे सिर्फ सामान नहीं बेचती बल्कि पसंद नहीं आने पर उसको वापस लौटाने के बहुतेरे विकल्प भी देती है।

कई बार अगर आप से सामान टूट भी जाता है और आप कंपनी से सामान वापस कर पैसा लेना चाहते हैं तो यह भी संभव हो जाता है जो आमतौर पर बाजार से खरीदने पर कोई सामान के समय नहीं होता।

अमेज़न कंपनी से करोड़ों ग्राहक समान खरीदते हैं और उनके ढेरों रिव्यू ग्राहकों को यह तय करने में मदद करते हैं कि क्या चीज महंगी है क्या चीज सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। हालांकि दूसरी ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म पर भी ग्राहकों के रिव्यु का विकल्प होता है लेकिन अमेज़न से 14 ग्राहक जुड़े होने की वजह से रिव्यू ज्यादा व्यापक होता है। हालांकि कई बार यह रिव्यू फर्जी भी साबित होता है क्योंकि उत्पाद के प्रतिद्वंदी कंपनी भी फर्जी रिव्यू के जरिए उत्पाद को बदनाम करने की कोशिश करते हैं। ग्राहक को चाहिए कि वे डबल चेक करें। दूसरे प्लेटफार्म पर भी देखें। गूगल पर भी चेक करें।

भारत की बात करें तो फ्लिपकार्ट अमेज़न को टक्कर दे रही है लेकिन अमेज़न के अलग-अलग कारोबार की वजह से फ्लिपकार्ट शायद थोड़ा हल्का पड़ रहा है, जैसे कि अमेज़न प्राइम वीडियो में दर्शक बहुत सारी फिल्में देख सकते हैं, अगर वह प्राइम मेंबरशिप ले लेते हैं जोकि हजार रुपए साल की होती है तो उन्हें सैकड़ों फिल्में देखने को मिल जाती हैं यहां तक कि कुछ नई फिल्में भी इस प्लेटफार्म पर रिलीज होती है।

प्राइम वीडियो नेटफ्लिक्स जैसे ऑनलाइन सिनेमा प्लेटफार्म को कड़ी टक्कर दे रहा है अमेज़न सारे स्ट्रीट फायर स्टिक भी काफी पसंदीदा है जिसे आप अपने टीवी पर लगाकर उसे और स्मार्ट टीवी क्या बना सकते हैं यदि आपका टीवी नॉन स्मार्ट टीवी है तो स्टिक के जरिए आप बहुत सारे streaming app का मज़ा ले सकते हैं।

हालांकि अमेज़न जैसे शॉपिंग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डिस्काउंट को लेकर कुछ विरोधाभास जरूर होता है क्योंकि एमआरपी पर जितना डिस्काउंट देने का दावा कंपनी करती है उसमें उससे कम पर कई बार बाजार में सामान मिल जाता है इसलिए सस्ती चीजें और डिस्काउंट को लेकर अभी पूरी तरीके से पारदर्शिता नहीं है। कई बार एमआरपी ज्यादा बढ़ा कर दिखाई जाती है और डिस्काउंट का प्रतिशत भी ज्यादा दिखाया जाता है इसलिए इसे लेकर डबल चेक किया जा सकता है।