घर की परेशानियों के सामने दम तोड़ रहे हैं सीमा पर रक्षा करने वाले

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CRPF कर्मियों में आत्महत्या की घटनाएं 2016 से 55% बढ़ीं, सरकार ने ‘निजी समस्याओं’ को जिम्मेदार बताया
2020 में सीआरपीएफ में आत्महत्या के 55 मामले सामने आए हैं. इनमें से 13 घटनाएं जम्मू-कश्मीर, 7 पूर्वोत्तर, 10 नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में और 15 देश के अन्य हिस्सों में हुईं.

यह आंकड़े बहुत चौंकाने वाले हैं कि सीमा पर सर्दी गर्मी बरसात में बैठकर देश की रक्षा करने वाले वीर जवान घर की टेंशन के सामने परेशान होकर कई बार आत्महत्या तक जैसा कदम उठा रहे हैं।

पिछले पांच वर्षों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के बीच आत्महत्या की घटनाएं 55 प्रतिशत बढ़ी हैं।

2020 में 17 नवंबर तक सीआरपीएफ में आत्महत्या के 45 मामले सामने आए है, जिसमें इस सप्ताह के शुरू में कश्मीर में सोपोर के वाडोदरा क्षेत्र में अपनी सर्विस राइफल से गोली मारकर आत्महत्या करने वाला जवान भी शामिल है।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के मामले देखने वाले गृह मंत्रालय (एमएचए) के आंकड़ों के अनुसार, 2016 में सीआरपीएफ में आत्महत्या की 29 घटनाएं सामने आई थी. 2017, 2018 और 2019 में यह संख्या क्रमशः 38, 36 और 42 रही।

2020 में आत्महत्या की 45 घटनाओं में से 13 जम्मू-कश्मीर, सात पूर्वोत्तर, 10 वामपंथी चरमपंथ (एलडब्लूई) प्रभावित क्षेत्रों में और 15 देश के अन्य हिस्सों में हुई हैं।

आधिकारिक तौर पर सरकार मान रही है कि ‘व्यक्तिगत और घरेलू सम्यायाएं’ आत्महत्या के पीछे मुख्य कारण है।

2018 में तत्कालीन गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने केंद्रीय सशस्त्र अर्धसैनिक बलों में आत्महत्या की घटनाओं पर संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा था, ‘आमतौर पर आत्महत्या का कारण व्यक्तिगत और घरेलू समस्याएं, जैसे वैवाहिक कलह, निजी दुश्मनी, मानसिक बीमारी आदि होती हैं।

वही अर्धसैनिक बल के अधिकारी ने कहा, ‘ज्यादातर कारण व्यक्तिगत होते हैं. वैवाहिक कलह आदि के कारण तनाव का स्तर बहुत ज्यादा होता है. इन दिनों सोशल मीडिया की वजह से भी समस्याएं काफी बढ़ गई हैं.’ अधिकारी ने आगे कहा, ‘घर पर जो कुछ भी होता है उसकी खबर जवान को तुरंत ही लग जाती है. लेकिन वह घर जा नहीं सकता. ऐसे में तनाव और बेबसी बढ़ जाती है. पहले 24×7 घंटे इस तरह भटकाव नहीं होता था.’ अधिकारियों का मानना है कि सरकार को और सीआरपीएफ के बड़े अधिकारियों को जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है।

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