कोरोना के खिलाफ सरकार की दिखावटी लड़ाई, नाम के कोवीड प्रोटोकॉल, नाम के कंटेनमेंट जोन

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कंटेनमेंट जोन के बाबत दिल्ली सरकार की वेबसाइट बताती है, ‘यदि कहीं पर तीन या तीन से ज्यादा कोरोना के केस सामने आते हैं तो उस जगह को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया जाता है, यहां तक कि किसी घर को भी इस आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है।

आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की तरफ से लागू प्रोटोकॉल के अनुसार, ऐसे क्षेत्रों में बैरीकेडिंग की जानी होती है और मरीज या जोखिम वाले संपर्क को अपने घर या क्षेत्र से बाहर निकलने से रोकने के लिए सिविल डिफेंस वॉलंटियर तैनात किए जाते हैं— इसके पीछे उद्देश्य संक्रमण को और ज्यादा फैलने से रोकना होता है.

इस माह की शुरुआत तक केजरीवाल सरकार दूसरों को आगाह करने के लिए कोविड मरीजों के घरों के बाहर पोस्टर लगवा रही थी. हालांकि, दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में यह व्यवस्था बंद कर दी गई जिसका उद्देश्य मरीजों को सामाजिक कलंक से बचाना था।

किसी कंटेनमेंट क्षेत्र को डी-कंटेनमेंट घोषित किया जाता है, ‘यदि चार सप्ताह तक उस कंटेनमेंट जोन में कोई पॉजिटिव केस सामने न आए.’

17 नवंबर तक के डाटा के मुताबिक दिल्ली में 4,501 कंटेनमेंट जोन हैं जिनमें से 1,000 को तो अकेले इसी महीने चिह्नित किया गया है क्योंकि राजधानी में कोविड केस नए सिरे से तेजी से बढ़े हैं।

दिल्ली के 11 में से सात जिलों के कंटेनमेंट जोन वाले 13 इलाकों का दौरा किया तो पाया कि कई जगह प्रोटोकॉल ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है।

उदाहरण के तौर पर 13 क्षेत्रों में केवल तीन— सभी दक्षिण पश्चिम दिल्ली जिले के नजफगढ़ में थे— में सिविल डिफेंस वॉलंटियर अपने निर्धारित स्थानों पर तैनात थे.

कम से कम छह जगहों पर आस-पड़ोस के लोगों को ही नहीं पता था कि उनके आसपास कोई कंटेनमेंट जोन है. बाकी चार में लोगों ने कहा कि उन्हें यह तो पता है कि आसपास कोई कंटेनमेंट जोन है लेकिन उसकी सही जगह के बारे में नहीं जानते थे।

टिप्पणी के लिए संपर्क किए जाने पर दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने कहा कि कोविड के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए वे कंटेनमेंट जोन की संख्या बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
हालांकि, कुछ अधिकारियों ने ऑफ द रिकॉर्ड कहा कि प्रोटोकॉल लागू करना हमेशा बहुत आसान नहीं होता है।


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