टीएमसी चाहती है दिल्ली में “अवैध” मंदिर हटे ताकि वे जमीन पर ऑफिस बना सके, केंद्र सरकार ने कहा पार्टी इसे हटाए

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दो अवैध मंदिर और भाजपा व तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक जंग की छाया पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी के दिल्ली ऑफिस पर पड़ती हुई दिख रही है

केंद्रीय शहरी और आवास विकास मंत्रालय ने दिसंबर 2013 को 1008 स्क्वायर मीटर भूमि केंद्रीय दिल्ली में दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित पर टीएमसी को अपने ऑफिस की बिल्डिंग बनाने के लिए दी थी।

लेकिन प्लॉट आवंटन होने के सात साल बाद भी तृणमूल कांग्रेस इस भूमि का अभी तक कब्जा नहीं ले पाई है क्योंकि इस जमीन पर कई सारे अतिक्रमण हुए भी हैं, जिसमें 2 मंदिर भी शामिल हैं जब तृणमूल कांग्रेस को यह जमीन मिली थी तब से ही यहां अतिक्रमण है और उसके बाद यह और बढ़ गए हैं।

तृणमूल कांग्रेस अब चाहती है कि शहरी विकास मंत्रालय जो इस जमीन का मालिक है वह अतिक्रमण को साफ करके जमीन उसे आवंटित करें जिससे वह अपना काम शुरू कर सके। पार्टी के सूत्रों ने बताया पार्टी ने यह भी कहा है कि केंद्र सरकार इस तरीके से बंगाल के साथ बुरा बर्ताव कर रही है।

इस बीच मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि पार्टी को भूमि “जैसी थी वैसी थी” के आधार पर दी गई थी और अब तृणमूल कांग्रेस को ही यह अतिक्रमण हटाना होगा।

तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि केंद्र सरकार उन पर कोई दया नहीं कर रही है। पार्टी देश की तीसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है चुनाव आयोग ने उसे राष्ट्रीय पार्टी घोषित किया है।

‘पार्टी के नेता का कहना है कि उसने सरकार को इस भूमि के लिए काफी पहले ही भुगतान कर दिया है। हमें भीख नहीं चाहिए। हमें अपना अधिकार चाहिए यह एक और उदाहरण है बंगाल को नीचा दिखाने का।

राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन और एक अन्य राज्य सभा सांसद सुब्रता बख्शी ने इस मामले को लेकर शहरी विकास मंत्रालय को कई छुट्टियां लिख दी हैं।

हालांकि मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि उनकी लैंड पॉलिसी नीति बिल्कुल साफ है इस नीति में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि अगर आवंटित भूमि पर कोई अतिक्रमण है तो उसे हटाने की जिम्मेदारी आवंटी की होगी। ऐसे में विवाद सोलस्ता हुआ नहीं दिख रहा है वैसे भी भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच 36 का आंकड़ा है। अगर दोनों पार्टियों के बीच थोड़ा बहुत भी दोस्ती होती तो शायद यह मामला सुलझ सकता था।

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