कोरोना वैक्सीन के आने से पहले सरकार ने राज्यों को कहा कि वह इसके साइड इफैक्ट्स रिपोर्ट करने के लिए बनाए सिस्टम

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मोदी सरकार का अनुमान है कि कोरोना के टीकाकरण का काम जल्दी शुरू हो जाएगा और इसलिए उसने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को कह दिया है कि वह वैक्सीन के साइड इफेक्ट को रिपोर्ट करने के लिए एक तंत्र तैयार करें।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉक्टर मनोहर अग्नि ने राज्यों को लिखी चिट्ठी में कहा है कि आप इस बात से परिचित होंगे कि कोविड के टीकाकरण का काम जारी है।

उन्होंने 18 नवंबर को यह चिट्ठी लिखी है।
अंगानी ने कहा है कि टीकाकरण से पहले राज्यों को एडवर्स इवेंट्स फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन निगरानी करने की जरूरत है ताकि टीकाकरण के बुरे प्रभाव का तुरंत पता लगाया जा सके दरअसल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में लीग महीनों से वैक्सीन के इंतजार में बैठे हैं और लोगों का कहना है कि किसी भी सूरत में उन्हें वैक्सीनेशन करवाई जानी चाहिए। ऐसे में भारत सरकार ने वैक्सीन के बुरे प्रभावों का समय रहते पता लगाने की भी प्रणाली को बनाने की कोशिश की है क्योंकि यह वायरस अजीब किस्म का वायरस है और पहली बार अस्तित्व में आया है, लिहाजा सरकार कोई जोखिम उठाना नहीं चाहती।

किसी भी व्यक्ति को वैक्सीन देने के बाद उसकी निगरानी का काम भारत में 1988 से चल रहा है यह प्रणाली एक दिशा निर्देश के तहत काम करती है और इस दिशानिर्देशों में 2005, 2010 और 2015 में बदलाव किया गया था इस प्रणाली के तहत बच्चों और गर्भवती महिलाओं को करवाए गए टीकाकरण अभियान की निगरानी की गई थी लेकिन अब कोरोना वैक्सीन के मामले में नई तरह की जरूरतें पड़ेगी।

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