अपने नेताओं को कब करेंगे पीएम कोरोना या महिलाओं पर फब्ती कसने से सचेत ?

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प्रधानमंत्री ने मंगलवार शाम 6:00 बजे आकर देश के नाम राष्ट्रीय संबोधन में लोगों को कोरोना से सचेत भले किया है, लेकिन जिस तरह से उनके नेता कोरोना से बचने के उपायों का माहौल उड़ा रहे हैं, उस पर भी उनको ध्यान देने की जरूरत है या फिर ऐसे नेताओं को कड़ी नसीहत या फिर एक्शन लेने का समय है।

प्रधानमंत्री ने यह तो जरूर कहा कि लोग लापरवाही कर रहे हैं लेकिन उनके मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के मंत्री नरोत्तम मिश्रा जब यह कहते हैं कि उनको मास्क की कोई जरूरत नहीं है तो उस पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

यहां तक कि महाराष्ट्र में मंदिर के कपाट खोलने के लिए बिना मास्क आंदोलनरत भाजपा नेता क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उद्बोधन सुनकर कुछ शर्मिंदा हुए।

अभी भी प्राथमिकता बदली नही है। जो सत्ता मे है उसकी जिम्मेदारी भी ज़्यादा है उदाहरण पेश करें। कोरोना खत्म नही हुआ।

पीएम ने बोला कि जब तक दवाई नही तब तक ढिलाई नही। प्रधानमंत्री ने कोरोना से लापरवाही न बरतने का अनुरोध किया।

क्या दनादन रैली कर रहे बीजेपी नेता,कार्यकर्ता इस बात को समझेंगे। बीजेपी सत्ता में है उसकी जिम्मेदारी दूसरी राजनीतिक दलों से ज्यादा है।

राहुल गांधी ने बी मंगलवार को अपने पार्टी के बेहद वरिष्ठ और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरेआम किरकिरी कर दी। एक भाजपा की महिला उम्मीदवार पर कमलनाथ की टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी ने उन्हें कड़ी नसीहत दे डाली।

भाजपा की ओर से भी कई नेता महिलाओं पर गंदी टिप्पणी कर चुके हैं। पार्टी के एक विधायक ने तो यहां तक कह डाला था कि लड़कियां बाजरे के खेत में क्यों ज्यादा मिलती हैं। ऐसे गंदे बयानों को लेकर आखिर क्यों नहीं पीएम मोदी की तरफ से कोई बयान दिया जाता।

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